राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत फरवरी में टीबी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 100 टीबी स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इन शिविरों के माध्यम से 4568 महिला-पुरुष एवं युवाओं की स्वास्थ्य जांच की। लक्षणों के आधार पर 276 संभावित टीबी रोगियों को चिन्हित किया गया। इनकी बलगम की जांच आधुनिक नॉट (NAAT) मशीन से कराई गई। जांच के बाद 38 मरीजों में क्षय रोग की पुष्टि हुई। राहत की बात यह है कि सभी पुष्ट मरीजों का उपचार तुरंत शुरू कर दिया गया है।
अभियान के दौरान एक हजार से अधिक लोगों के चेस्ट एक्स-रे भी किए गए। जिन व्यक्तियों में टीबी के लक्षण पाए गए, उन्हें विस्तृत जांच और समुचित उपचार के लिए उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया गया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीव यादव ने बताया कि फरवरी में लगे शिविरों के माध्यम से 38 मरीजों की पहचान कर उपचार आरंभ किया गया है। अभियान की प्रगति से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राधावल्लभ को भी अवगत कराया गया है। जिला कार्यक्रम समन्वयक शिवकुमार ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें टीबी के प्रति जागरूक किया गया।
इस अभियान में एसटीएस, एसटीएलएस, टीबीएचवी एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नागरिकों की सहभागिता सराहनीय रही। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, वजन में कमी या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। समय पर पहचान और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।