किसान और अधिवक्ताकिसान और अधिवक्ता ने लेखपाल पर रिश्वत मांगने व मारपीट का लगाया आरोप, लेखपाल ने आरोपों को बताया निराधार
बरेली जनपद के मीरगंज तहसील परिसर में शुक्रवार को लेखपाल और अधिवक्ता के बीच हुए विवाद के बाद हंगामे की स्थिति बन गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाए। मामले में पीड़ित अधिवक्ता की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मीरगंज तहसील के अधिवक्ता मोर सिंह ने थाना मीरगंज पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल भूपाल, निवासी ग्राम सैंजना की गौटिया, अपने दिवंगत पिता का वारिसान प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई दिनों से तहसील के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि वारिसान रिपोर्ट लगाने के लिए हल्का लेखपाल उमा शंकर राणा ने उनसे 1500 रुपये की रिश्वत की मांग की।
अधिवक्ता का कहना है कि जब वह अपने मुवक्किल के साथ लेखपाल से मिलने पहुंचे और कथित रिश्वत मांगने का विरोध किया, तो लेखपाल ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि लेखपाल ने मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी। शोर-शराबा सुनकर मौके पर पहुंचे अन्य अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
इसी मामले को लेकर पीड़ित किसान भूपाल, निवासी ग्राम सैंजना, ने शपथ पत्र के साथ उपजिलाधिकारी आलोक कुमार को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि लेखपाल ने वारिसान रिपोर्ट लगाने के नाम पर 1500 रुपये की मांग की और पैसे न देने पर गाली-गलौज करते हुए मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी।
लेखपाल ने आरोपों को बताया निराधार
मीरगंज तहसील में तैनात हल्का लेखपाल उमा शंकर राणा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि अधिवक्ता और उनके साथ आए लोग एक कार्य को लेकर उन पर दबाव बना रहे थे, जबकि उस कार्य में कुछ त्रुटियां थीं और उसे पूरा करना संभव नहीं था। इसी बात को लेकर विवाद हो गया और अधिवक्ता पक्ष ने उनके साथ अभद्रता व हाथापाई की।
मामले में दोनों पक्षों की शिकायत मिलने के बाद मीरगंज पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।