जागरण टुडे गुड्डू यादव, कासगंज।
जनपद कासगंज के सहावर कस्बे के मोहल्ला चौधरी स्थित एक पुश्तैनी बंगले को लेकर पूर्व सांसद और पूर्व विधायक के परिवारों के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया। संपत्ति के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। इसी क्रम में सिविल न्यायालय के आदेश पर सोमवार, 16 मार्च को विवादित हिस्से में बने अवैध निर्माण के चौखट और जंगले तोड़ दिए गए।
जानकारी के अनुसार यह बंगला पूर्व सांसद मलिक मोहम्मद मुशीर अहमद खान और पूर्व विधायक जमीर अहमद उर्फ रफन मियां की पुश्तैनी संपत्ति है। दोनों परिवारों के वारिसों के बीच बंटवारे को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। पूर्व विधायक जमीर अहमद के पुत्र रफत मुनीर ने दावा किया था कि उक्त संपत्ति का एक हिस्सा उनके पैतृक अधिकार में आता है।
रफत मुनीर का आरोप है कि उनके ताऊ पूर्व सांसद मुशीर अहमद खान के परिवारजनों—पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष जाहिदा सुल्तान और उनके भाई मुईर अहमद खान—ने विवादित हिस्से पर कब्जा कर निर्माण करा लिया। जबकि इस संपत्ति पर पहले से ही सिविल न्यायालय द्वारा स्थगन (स्टे) आदेश लागू था।
बताया गया कि न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए निर्माण कार्य किया गया, जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। मुकदमा संख्या 43/24, दिनांक 24 फरवरी 2026 में न्यायालय ने एल-कमीशन जारी कर अमीन अवधेश यादव को मौके पर जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अमीन अवधेश यादव, थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद बल्लभ शर्मा और पुलिस बल की मौजूदगी में बंगले के उस बड़े हॉल के दरवाजों के चौखट और जंगले तोड़ दिए गए, जो विवादित बताया जा रहा था। यह कार्रवाई देर शाम तक चली और पूरे क्षेत्र में हलचल का माहौल बना रहा।
इसके साथ ही न्यायालय ने अगले छह महीनों तक उक्त संपत्ति में किसी भी प्रकार का निर्माण या बदलाव न करने के सख्त निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन ने दोनों पक्षों को आदेश का पालन करने की चेतावनी दी है।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोग आगे होने वाले न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।