_पटियाली थाने में व्यापारी से अवैध वसूली का मामला तूल पकड़ता हुआ; जांच में नए खुलासों के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र में सराफा व्यापारी से कथित अवैध वसूली के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच के दौरान दो इंस्पेक्टर और एक पूर्व SOG प्रभारी के नाम सामने आने के बाद तीनों अधिकारी जिले से फरार हो गए हैं। इनमें से एक इंस्पेक्टर को महज नौ दिन पहले ही पटियाली थाने का चार्ज सौंपा गया था।
यह मामला 20 जुलाई 2025 का है, जब सहावर निवासी सराफा व्यापारी अजय कुमार वर्मा को कथित रूप से दुकान से उठाकर थाने ले जाया गया। आरोप है कि वहां उनसे 50 हजार रुपये और सोना-चांदी लिया गया। इसके बाद भी उन्हें नहीं छोड़ा गया और परिजनों से उधार मंगवाकर तीन लाख रुपये और वसूले गए। रकम मिलने के बाद ही उन्हें रिहा किया गया।
पीड़ित की शिकायत पर मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद एसपी अंकिता शर्मा के निर्देश पर पटियाली थाने में सिपाही सोवरन सिंह, पवन कुमार, भाजपा नेता डॉ. भूदेव सिंह राजपूत और अज्ञात कोतवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
शुरुआती एफआईआर में थाना प्रभारी, SOG प्रभारी और सर्विलांस प्रभारी के नाम शामिल नहीं किए गए थे, जिससे जांच पर सवाल खड़े हुए। बाद में डीजीपी के निर्देश पर विवेचक ने दोबारा जांच करते हुए इन अधिकारियों के नाम शामिल कर लिए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
गोपनीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, जिनमें से दो सिपाहियों को जेल भी भेजा गया था। हालांकि उन्हें बाद में जमानत मिल गई। वहीं, आरोपित इंस्पेक्टर और दारोगा को पहले बहाल कर दिया गया, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित ने डीजीपी से मुलाकात कर आरोप लगाया कि आरोपित अधिकारियों को जिले से बाहर भेजने के बजाय स्थानीय थानों में ही तैनात किया गया, जिससे उसके परिवार में भय का माहौल है। साथ ही मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव और धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं।
डीजीपी राजीव कृष्ण के सख्त निर्देशों के बाद अब जांच में तेजी आई है और नाम सामने आते ही तीनों आरोपी अधिकारी फरार हो गए हैं। फिलहाल मामले में बरामदगी और गिरफ्तारी को लेकर पुलिस पर दबाव बढ़ता जा रहा है।