जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करना सदर कोतवाली के एक उपनिरीक्षक को भारी पड़ता नजर आ रहा है। वांछित आख्या समय पर प्रस्तुत न करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित दारोगा के खिलाफ अभिमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुकदमा अपराध संख्या 124/2026 में न्यायालय द्वारा सदर कोतवाली के उपनिरीक्षक मोहम्मद इलियास, जो इस मामले के विवेचक भी हैं, से वांछित आख्या मांगी गई थी। यह आख्या राहुल, शिवम और कोमल नामक आरोपियों के संबंध में प्रस्तुत की जानी थी। हालांकि, विवेचक द्वारा केवल एक आरोपी को वांछित बताते हुए आंशिक रिपोर्ट ही न्यायालय में दाखिल की गई, जबकि अन्य दो आरोपियों के संबंध में कोई स्पष्ट आख्या प्रस्तुत नहीं की गई।
अधिवक्ता केशव मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में न्यायालय द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद पूर्ण आख्या प्रस्तुत नहीं की गई। इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुपमा सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तीसरी बार नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित उपनिरीक्षक के खिलाफ अभिमानना की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मची हुई है। न्यायालय के इस सख्त रुख को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपनिरीक्षक की ओर से क्या जवाब प्रस्तुत किया जाता है और आगे न्यायालय क्या कार्रवाई करता है।