उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (DUVASU) में विश्व पशु चिकित्सा दिवस जनसेवा के साथ मनाया गया। कुलपति डॉ. अभिजित मित्र के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय पशु चिकित्सालय में एंटी-रेबीज़ टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया, जिसमें 90 कुत्तों का टीकाकरण किया गया।
इसके साथ ही परखम स्थित गऊ ग्राम गौशाला में व्यापक पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। यहां करीब 160 गायों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 35 पशु बुखार, अपच, दस्त जैसी बीमारियों से ग्रसित पाए गए या लंपी स्किन रोग से उबर रहे थे। इन सभी पशुओं का मौके पर ही उपचार किया गया। वहीं, बेहतर प्रजनन प्रबंधन के तहत 18 पशुओं की गर्भ जांच भी की गई।
पशुओं के पोषण स्तर को सुधारने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित खनिज मिश्रण “ड्यूमिन” का भी वितरण किया गया। इस दौरान कुलपति डॉ. अभिजित मित्र ने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान अब केवल पशुओं के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, पोषण और जनस्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा है। उन्होंने “वन हेल्थ” अवधारणा पर जोर देते हुए मानव, पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कार्यकारी निदेशक डॉ. अमित शर्मा ने सुरक्षित पशु आहार और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) की बढ़ती चुनौती पर चिंता जताई। उन्होंने एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग और अफ्लाटॉक्सिन जैसे खतरों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
वहीं, मैक्स वेटरनरी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रीत पाल सिंह ने पशु चिकित्सा क्षेत्र में हो रही आधुनिक प्रगति जैसे अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन और उन्नत सर्जिकल तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टीकाकरण, डीवॉर्मिंग और संतुलित पोषण जैसे निवारक उपाय पशु स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं।
कार्यक्रम का संचालन पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विकास पाठक के निर्देशन में हुआ। इस अवसर पर वाद-विवाद, चित्रकला, फोटोग्राफी और राष्ट्रीय ई-क्विज प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं, जिनमें विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। संकाय सदस्यों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सफल रहा।