जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कस्बा गंजडुंडवारा के मोहल्ला खेरू निवासी 72 वर्षीय दवा व्यापारी मुहम्मद स्वालेह अंसारी से “डिजिटल अरेस्ट” कर 31 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जनपदीय साइबर सेल व थाना गंजडुंडवारा पुलिस की संयुक्त टीम ने राजस्थान निवासी दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज, चेक और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
ऐसे बनाया था बुजुर्ग को शिकार
पीड़ित मुहम्मद स्वालेह अंसारी के अनुसार 12 मार्च 2026 को उनके पास एक कॉल आई। कॉल करने वाली महिला ने खुद को “डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया” की अधिकारी प्रिया शर्मा बताया। उसने कहा कि मुंबई में उनके नाम से बैंक खाता खोलकर आतंकियों को धन भेजा गया है। साथ ही “पुलावा मुंबई हेडक्वार्टर” में दर्ज कथित केस का हवाला देकर मामला बेहद गंभीर बताया गया।
ठगों ने डर पैदा करने के लिए यह भी कहा कि आतंकियों के ठिकाने पर छापेमारी में उनका आधार कार्ड बरामद हुआ है। भरोसा कायम करने के लिए कथित 6 आतंकियों के पोस्टर भी भेजे गए। इसके बाद खुद को पुलिस, CBI, NIA और RBI से जुड़ा अधिकारी बताकर उन्हें लगातार डराया गया।
7 दिन तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’
12 मार्च से 19 मार्च तक ठगों ने बुजुर्ग को फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” में रखा। उन्हें कमरे में अकेले रहने, किसी से बात न करने और हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर “रिपोर्ट” देने को मजबूर किया गया।
इसी दौरान उनसे RTGS फॉर्म भरवाए गए और दो किश्तों में 26 लाख रुपये व 5 लाख रुपये, कुल 31 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
रकम वापस करने का दिया झांसा
ठगों ने खुद को RBI से जुड़ा बताकर भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी झांसे में आकर पीड़ित लगातार उनके संपर्क में बने रहे और उन्हें भरोसा होता गया कि पैसा सुरक्षित लौट आएगा।
इतना ही नहीं, ठगों ने पीड़ित पर और रकम भेजने का दबाव बनाया, जिसके चलते वह अपनी एफडी तुड़वाने तक की तैयारी करने लगे थे।
बच्ची की सूझबूझ से बची थी बड़ी ठगी
मामले का खुलासा तब हुआ जब घर में एक बच्ची ने पीड़ित के फोन पर संदिग्ध मैसेज देखे और परिजनों को जानकारी दी। परिवार ने तुरंत हस्तक्षेप कर आगे की रकम ट्रांसफर होने से रोक दिया, जिससे और बड़ी ठगी टल गई। इसके बाद 19 मार्च को थाना गंजडुंडवारा में मुकदमा दर्ज कराया गया।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार गंगा प्रसाद व क्षेत्राधिकारी क्राइम अमित कुमार के नेतृत्व में जनपदीय साइबर सेल और थाना गंजडुंडवारा पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों की ट्रांजेक्शन डिटेल खंगालने पर पता चला कि ठगी के 31 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए गए थे।
जांच में सामने आया कि इनमें से 6,10,000 रुपये राजस्थान के मांगीलाल बिश्नोई पुत्र हनुमनाराम निवासी सांचौर, जिला जालौर के खाते में पहुंचे थे। मांगीलाल ने इनमें से 6 लाख रुपये का चेक जारी कर अपनी साथी निर्मला पुत्री मोहनलाल निवासी शेरानियां का धनी, सिवाड़ा, जिला जालौर को दिया, जिसने उक्त रकम कैश करा ली।
घेराबंदी कर दबोचे गए आरोपी
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने सोमवार को अम्बर मोड़, एटा बाईपास, सिद्धपुरा के पास घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी मांगीलाल ने बताया कि उसकी साथी निर्मला लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड को फर्जी तरीके से एडिट कराती थी। उन्हीं दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में उन्हीं खातों से चेक बुक जारी कराकर साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को चेक के माध्यम से निकाल लिया जाता था।
फर्जी दस्तावेज और चेक बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जाली पैन कार्ड की प्रतियां, फर्जी चेक, आधार कार्ड व अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
खुलासा करने वाली टीम
प्रभारी निरीक्षक गंजडुंडवारा राधेश्याम, निरीक्षक विवेचक कल्याण सिंह, उपनिरीक्षक सोनू सिंह प्रभारी साइबर सेल, कांस्टेबल शैलेंद्र चौधरी तथा कांस्टेबल दिग्विजय त्यागी शामिल रहे।
सावधान रहें, ऐसे साइबर ठगी से बचें
पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने लोगों से अपील की है कि कोई भी खुद को पुलिस, CBI, NIA या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर डराए-धमकाए तो घबराएं नहीं। किसी भी हाल में बैंक डिटेल, OTP, RTGS/NEFT या रकम ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत करें।