₹1000 हर्जाने के साथ पुनः कल होगी जिरह
जनपद न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में बुधवार को अवैध फर्म संचालन से जुड़े चर्चित कूटरचना मामले की सुनवाई हुई। मामले में कृषि उत्पादन मंडी समिति गंजडुंडवारा के तत्कालीन सचिव प्रेम शंकर शर्मा सीजेएम कोर्ट में गवाही देने पहुंचे, जहां उनका बयान दर्ज किया गया।
मामला गंजडुंडवारा निवासी अनिल कुमार गुप्ता एवं मुनीश कुमार गुप्ता द्वारा “जवाहर लाल रमेश चन्द्र” नाम से रेलवे रोड पर फर्म संचालित करने से जुड़ा है। गवाही पूरी होने के बाद आरोपित पक्ष के अधिवक्ता द्वारा समयाभाव का हवाला देते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
जिसका वादी सुरेन्द्र प्रकाश विजय पक्ष के अधिवक्ता नरेन्द्र शर्मा एवं मोहम्मद अयाज ने विरोध करते हुए सुनवाई जारी रखने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय सीजेएम जीशान मसूद ने सख्ती दिखाते हुए ₹1000 हर्जाने की शर्त पर स्थगन मंजूर किया।
माननीय न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई एवं जिरह के लिए कल यानी 14 मई, गुरुवार की तारीख निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला
कस्बा गंजडुण्डवारा निवासी सुरेन्द्र प्रकाश विजय ने वर्ष 2018 में पुलिस अधीक्षक कासगंज को प्रार्थना पत्र देकर फर्जी प्रपत्रों का दुरुपयोग, धोखाधड़ी एवं गलत बयानी कर गुमराह करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी।
प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि वर्ष 2015 में जिलाधिकारी कार्यालय में फर्म “जवाहरलाल रमेश चन्द्र” के संबंध में शिकायत की गई थी, जिसमें राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी, एवं फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के बाद जांच उपरांत प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए थे।
आरोप था कि अनिल कुमार गुप्ता पुत्र श्याम बाबू एवं मुनीश कुमार गुप्ता पुत्र जवाहर लाल ने वर्ष 1992 में बंद हो चुकी फर्म से संबंधित पुराने दस्तावेजों एवं न्यायालय के आदेशों का दुरुपयोग कर वर्ष 2009 में वाणिज्य कर विभाग में धोखाधड़ी से पंजीकरण प्राप्त कर लिया। साथ ही कृषि उत्पादन मंडी समिति गंजडुण्डवारा में भी फर्म का अवैध संचालन किया गया, जिसे बाद में विभागीय संज्ञान में आने पर निरस्त कर दिया गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया था कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वर्ष 2014 में विद्युत विभाग से बिजली कनेक्शन भी प्राप्त कर लिया गया।
मामले की जांच के उपरांत तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। विवेचना पूरी होने पर विवेचक ने सभी आरोप सिद्ध होने पर धारा 420, 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत आरोप पत्र जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। मामले में नगर पालिका गंजडुंडवारा के लिपिक, कृषि उत्पादन मंडी समिति गंजडुंडवारा के तत्कालीन सचिव, एक स्टांप वेंडर एवं नोटरी अधिवक्ता को गवाह बनाया गया है।
वर्तमान में मामले की सुनवाई न्यायालय में जारी है तथा वादी पक्ष के अधिवक्ता द्वारा लगातार प्रभावी पैरवी की जा रही है।