- आयात नीति में बड़े बदलाव से सर्राफा कारोबारियों और ज्वैलरी उद्योग में बढ़ी चिंता
- प्रीमियम बढ़ने और बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका, डीजीएफटी से स्पष्ट गाइडलाइन जारी करने की मांग
- जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
- केंद्र सरकार द्वारा चाँदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद अब सिल्वर बार और सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर के आयात पर भी बड़ी बंदिशें लगा दी गई हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने नोटिफिकेशन जारी कर इन वस्तुओं को “फ्री” श्रेणी से हटाकर “प्रतिबंधित” श्रेणी में शामिल कर दिया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
- नई व्यवस्था के अनुसार ऐसे सिल्वर बार, जिनमें वजन के हिसाब से 99.9 प्रतिशत या उससे अधिक चाँदी हो, अब प्रतिबंधित श्रेणी में आएंगे। इसके अलावा गोल्ड या प्लेटिनम प्लेटिंग वाले सिल्वर बार और सिल्वर पाउडर को भी इसी दायरे में रखा गया है। अब इन वस्तुओं के आयात के लिए कारोबारियों को सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
- आईटीसी (एचएस) कोड 71069221 और 71069229 के तहत आने वाले सिल्वर बार की आयात नीति में बदलाव को लेकर ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जिला सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री दीपक गुप्ता सर्राफ ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर घरेलू सिल्वर सप्लाई चेन, ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग प्रीमियम और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।
- उन्होंने कहा कि यदि आयात प्रक्रिया में देरी, लाइसेंसिंग संबंधी अनिश्चितता या क्लीयरेंस में बाधाएं आती हैं तो घरेलू बाजार में चाँदी का प्रीमियम बढ़ सकता है। साथ ही एमसीएक्स और फिजिकल मार्केट में असामान्य उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
- दीपक गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाँदी की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद भारत में चाँदी ऊंचे प्रीमियम पर ट्रेड कर सकती है। उन्होंने डीजीएफटी से मांग की कि वैध ज्वैलरी और बुलियन कारोबारियों के लिए आयात अनुमति की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाए, ताकि बाजार में भ्रम और अनावश्यक सट्टेबाजी की स्थिति न बने।