गुड्डू यादव, कासगंज
जिला कारागार कासगंज इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। न्यायालय में तारीख पर पहुंचे बंदियों और उनके परिजनों ने जेल प्रशासन पर अमानवीय व्यवहार, मारपीट और अवैध वसूली जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि एक सजायाफ्ता कैदी को मारपीट कर पेशाब पिलाने का आरोप है। इन आरोपों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसकी लिखित शिकायत न्यायालय में की गई है।
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बंदी बोले-आए दिन की जाती है मारपीट, मुलाकात भी बंद कर दी
शुक्रवार 29 अगस्त को न्यायालय में तारीख पर आए बंदी कल्लू ने बताया कि जेल में आए दिन कैदियों के साथ मारपीट की जाती है। मिलाई (परिवार से मुलाकात) भी बंद कर दी गई है। आरोप है कि एक सजायाफ्ता कैदी को जेल में बुरी तरह पीटा गया और उसे पेशाब पिलाने तक की शर्मनाक हरकत की गई।बंदियों के परिजनों ने भी जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। सहावर की रहने वाली मुर्सरत ने बताया कि उनके पति शुगर के मरीज हैं, लेकिन जेल प्रशासन बाहर का सामान ले जाने नहीं देता।
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आरोप है कि कैंटीन से ही महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। विरोध करने पर धमकाया जाता है कि दूसरी जेल भेज दिया जाएगा, जहां मुलाकात भी संभव नहीं होगी। बंदी राज माहेश्वरी की पत्नी शालिनी ने आरोप लगाया कि महिलाओं को सीसीटीवी कैमरों के सामने कपड़े उतरवाकर चेकिंग की जाती है, और जेल अधीक्षक खुद वहीं मौजूद रहते हैं। शालिनी ने बताया कि 24–25 अगस्त को उनके पति के साथ मारपीट की गई, और बगिया में जबरन काम कराया गया। बंदियों ने इसके विरोध में भूख हड़ताल भी की थी।
अधिवक्ताओं ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
अधिवक्ता केशव मिश्रा ने बताया कि कि उनके पास कई बंदियों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि नए जेल अधीक्षक कैदियों के साथ अभद्र और अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। परिवार वालों से भी अवैध वसूली की जाती है। महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार करने का आरोप है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
जेल प्रशासन का पक्ष
डिप्टी जेलर रामदास ने का कहना है कि कैदियों और उनके परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। जेल में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और बाहर से पैकिंग सामान लाने पर कोई रोक नहीं है। अवैध वैसूली का आरोप गलत है।