उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्र ने विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय की जड़ें सन 1947 में स्थापित उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़ी हैं, जबकि वर्तमान विश्वविद्यालय की स्थापना 2001 में की गई थी। यहां पशु चिकित्सा, मत्स्यिकी, डेरी साइंस, पशुपालन और जैव प्रौद्योगिकी में स्नातक, परास्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), वर्ल्ड बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) कर शोध और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाएगा। साथ ही, डेरी विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान महाविद्यालयों में द्वितीय वर्ष की कक्षाएं चलाने हेतु नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
मत्स्य महाविद्यालय में तालाब को आदर्श मत्स्य पालन इकाई के रूप में विकसित करने और डेरी महाविद्यालय में दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। डॉ. मित्र ने बताया कि भारत 26% दूध उत्पादन के साथ विश्व में पहले स्थान पर है, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 16% है। उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि पशु कल्याण, देसी नस्लों के संरक्षण, और एंटीबायोटिक के सही उपयोग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या न बढ़े। इसके साथ ही, वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण के तहत मानव, पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है जिससे महामारियों और स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
कुलपति ने कहा कि नवीनतम तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है ताकि लघु और सीमांत किसान बेहतर उत्पादकता हासिल कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें।