जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कहते हैं असली वीरता सिर्फ कर्तव्य निभाने में नहीं, बल्कि हर उस जीवन के प्रति संवेदनशील होने में है जो खुद अपनी पीड़ा भी बयां नहीं कर सकता। जनपद के गंजडुंडवारा रेलवे स्टेशन पर ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने खाकी वर्दी के भीतर छिपे इंसानियत के असली चेहरे को उजागर कर दिया।
अचानक करंट की चपेट में आकर एक बेजुबान बंदर तड़पता हुआ जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोग सहमे हुए थे, कोई समझ नहीं पा रहा था कि क्या किया जाए। तभी वहां ड्यूटी पर तैनात यूपी 112 के सिपाही चिराग भारद्वाज और रीतेश कुमार उर्फ सिंघम किसी फरिश्ते की तरह आगे आए।
बिना अपनी परवाह किए, बिना एक पल गंवाए, दोनों जवानों ने घायल बंदर को सावधानी से उठाया। उसकी तड़प को महसूस करते हुए उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और इलाज की व्यवस्था कराई। उस वक्त उनकी आंखों में सिर्फ एक ही जज्बा था—एक बेजुबान की जान बचाने का।
यह सिर्फ एक मदद नहीं थी, बल्कि यह उस इंसानियत की मिसाल थी जो आज के दौर में कहीं खोती जा रही है। इन सिपाहियों ने यह साबित कर दिया कि खाकी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा, दया और सेवा का भी दूसरा नाम है।
मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी—“अगर हर दिल में ऐसी संवेदना हो, तो दुनिया और भी खूबसूरत बन जाए।”
इन जांबाज सिपाहियों के इस नेक कार्य ने न सिर्फ एक मासूम जीवन को बचाया, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश भी दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।