Wednesday, June 3, 2026

KASGANJ NEWS एनसीईआरटी पुस्तक से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने पर पुनर्विचार की मांग

लेखक: Guddu Yadav | Category: उत्तर प्रदेश | Published: April 22, 2026

KASGANJ NEWS एनसीईआरटी पुस्तक से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने पर पुनर्विचार की मांग

जागरण टुडे, कासगंज। 


एनसीईआरटी पुस्तक से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने पर पुनर्विचार की मांग सोरों निवासी लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रार्थना पत्र भेजकर की है। उन्होने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटाने के निर्देश पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में इस विषय पर कई महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।

पत्र में लेखक ने न्यायपालिका को लोकतंत्र का “मस्तिष्क” बताते हुए उसकी गरिमा और सर्वोच्चता को रेखांकित किया है। उनका कहना है कि न्यायपालिका की तुलना अन्य संवैधानिक अंगों से करना उचित नहीं है, क्योंकि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का प्रमुख स्तंभ है।

अशोक कुमार पाण्डेय ने शिक्षा में पारदर्शिता और जागरूकता के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने लिखा कि शिक्षा का उद्देश्य किसी संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि उसके कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुधार की दिशा में प्रेरित करना होना चाहिए। उनके अनुसार, छात्रों को वास्तविकताओं से अवगत कराना उन्हें जिम्मेदार और सजग नागरिक बनने में मदद करता है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि भ्रष्टाचार एक सामाजिक बुराई है, जिससे कोई भी संस्था पूरी तरह अछूती नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन चुनौतियों से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकें।

पत्र में सूचना के अधिकार (RTI) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर ही छात्रों को उनके संवैधानिक अधिकारों और जवाबदेही की समझ विकसित की जानी चाहिए। इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

अशोक कुमार पाण्डेय ने सुझाव दिया कि विवादित अध्याय को हटाने के बजाय उसमें आवश्यक संशोधन किया जाए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका की उपलब्धियों, सुधारों और चुनौतियों को संतुलित रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिससे छात्रों में विश्वास और जागरूकता दोनों का विकास हो सके।

प्रार्थना पत्र के साथ दैनिक जागरण (25 फरवरी 2026) और अमर उजाला आगरा (26 फरवरी 2026) की समाचार प्रतियां भी संदर्भ के लिए संलग्न की गई हैं।

पत्र के अंत में लेखक ने अपनी “आंतरिक वेदना” व्यक्त करते हुए न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने तथा शैक्षणिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की अपील की है।

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