जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
जिले के भिटौना पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका निलंबन का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ विद्यालय में बच्चों से मिलने पहुंचीं। आरोप है कि उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विद्यालय के बाहर आवास विकास चौकी इंचार्ज रवि वर्मा के साथ ग्राम प्रधान धीरज वर्मा भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि प्रधान हाथ में डंडा लिए स्कूल गेट पर खड़े थे। जैसे ही राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ विद्यालय पहुंचीं, उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया। उनसे कहा गया कि विद्यालय खुल चुका है और बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जब रेनू गौड़ ने रोकने वाले व्यक्ति से परिचय पूछा तो जवाब मिला कि वह गांव के प्रधान धीरज वर्मा हैं। इस दौरान कुछ देर तक गेट पर बहस और तनातनी की स्थिति बनी रही। बाद में काफी जद्दोजहद के बाद आयोग सदस्य विद्यालय के अंदर पहुंच सकीं और वहां अध्ययनरत बच्चों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना।
विवाद को और हवा उस सोशल मीडिया पोस्ट से मिली, जिसे कथित तौर पर ग्राम प्रधान धीरज वर्मा ने अपने फेसबुक पेज पर साझा किया था। पोस्ट में चेतावनी भरे अंदाज में लिखा गया था कि यदि किसी ने स्कूल का गेट बंद करने या बच्चों को विद्यालय जाने से रोकने की कोशिश की तो पुलिस की लाठियां चलेंगी। पोस्ट में यह भी लिखा गया कि ऐसी कार्रवाई होगी कि “पूरी जिंदगी कोर्ट में तारीख करते-करते निकल जाएगी।”
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया। राज्य महिला आयोग की सदस्य ने विद्यालय पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और बच्चों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।