शताब्दी वर्ष में 75 दिवंगत स्वयंसेवकों पर लिखी पुस्तक का विमोचन
जनपद मथुरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार शाम एक भावनात्मक और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के चित्रकूट स्थल पर आयोजित समारोह में संघ के 75 दिवंगत स्वयंसेवकों के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘संघ सरिता के अमर मोती’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और दिवंगत कार्यकर्ताओं के परिजनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम आयोजन समिति के संयोजक एवं पुस्तक के संकलनकर्ता अजय सर्राफ ने बताया कि इस पुस्तक के संकलन का कार्य कोरोना काल में शुरू किया गया था। संघ के शताब्दी वर्ष में यह प्रयास पुस्तक के रूप में साकार हो सका। उन्होंने बताया कि पुस्तक में मथुरा शहर के उन स्वयंसेवकों के जीवन प्रसंग शामिल हैं, जिन्होंने संघ की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और अब इस संसार से विदा हो चुके हैं।
पुस्तक में मथुरा में संघ कार्य की शुरुआत से लेकर वर्ष 1940 के दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में स्वयंसेवकों ने संगठन को खड़ा किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सुतीक्ष्ण दास ने कहा कि संघ व्यक्ति को राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ‘अमर मोती’ नाम अपने आप में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मोती भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवक भी भगवान की माला के मोती की तरह हैं।
वयोवृद्ध स्वयंसेवकों ने 1975 की आपातकाल अवधि को याद करते हुए बताया कि उस समय बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को जेल भेजा गया था। इसके बावजूद संघ के कई स्वयंसेवक भूमिगत रहकर लगातार संगठनात्मक कार्य करते रहे। वक्ताओं ने इसे संघ की अनुशासन और समर्पण की परंपरा का उदाहरण बताया।
मुख्य वक्ता एवं संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. दिनेश ने कहा कि संघ की कार्यपद्धति हमेशा प्रसिद्धि से दूर रहकर समाज सेवा करने की रही है। हालांकि नई पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं, ताकि युवा अपने पूर्वज स्वयंसेवकों के संघर्ष और त्याग को जान सकें।
संघ के प्रांत कार्यवाह राजकुमार एडवोकेट ने कहा कि पुस्तक में शामिल प्रत्येक नाम संघ के इतिहास का एक अध्याय है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई वरिष्ठ स्वयंसेवकों के साथ काम करने का अवसर मिला और हर व्यक्ति से सीखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान दिवंगत स्वयंसेवकों के परिवारों को मंच पर सम्मानित किया गया। जब मंच से उनके जीवन परिचय और संघर्षों का उल्लेख किया गया तो कई परिजन भावुक हो उठे। समारोह में विश्व हिंदू परिषद, विद्या भारती और संघ परिवार से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेश चंद्र करांची वालों ने की। अंत में वंदेमातरम् गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।