जनपद में यूरिया उर्वरक की रिकॉर्ड बिक्री के बाद कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं, जबकि चार सहकारी समितियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संदिग्ध बिक्री और निर्धारित सीमा से अधिक यूरिया खपत की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई।
जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से 10 मई 2026 तक जनपद में यूरिया की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक दर्ज की गई। मामले की जांच के लिए कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर संयुक्त कृषि निदेशक अलीगढ़ मंडल श्रवण कुमार को नामित किया गया था।
शुक्रवार को संयुक्त कृषि निदेशक ने राया और बल्देव क्षेत्र में स्थित सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और अधिक यूरिया खरीदने वाले किसानों के मोबाइल नंबरों का सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने किसानों से फोन पर वार्ता कर बिक्री की वास्तविकता जांची।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 में 1 अप्रैल से 10 मई तक 1445 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी, जबकि इस वर्ष समान अवधि में यह बढ़कर 2416 मीट्रिक टन पहुंच गई। यानी 971 मीट्रिक टन अधिक यूरिया की बिक्री दर्ज की गई। इसे गंभीर मानते हुए विभाग ने कार्रवाई शुरू की।
जिन उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं उनमें दिव्यांश खाद बीज भंडार हुलवाना, अग्रवाल खाद बीज भंडार अडींग, एग्रीजंक्शन केंद्र कादौना, किसान सेवा केंद्र उटावर, एग्रीजंक्शन केंद्र राया नहर रोड, जौशी खाद भंडार सहार, कृष्णा खाद बीज भंडार शेरगढ़, एग्रीजंक्शन केंद्र तुमौला, प्रधान जी किसान केंद्र सोंख और श्री बिहारी जी खाद बीज भंडार सिवाल शामिल हैं।
इसके अलावा दीनदयालधाम फरह, नगला जंगली, पैगांव और नौहझील पूर्वी की सहकारी समितियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में जनपद में 17591 मीट्रिक टन यूरिया और 7569 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और अनावश्यक भंडारण न करें। विभाग ने संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ जैविक और सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले उर्वरकों के प्रयोग पर भी जोर दिया है।