राजकीय संग्रहालय मथुरा में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस सिर्फ एक औपचारिक आयोजन बनकर नहीं रह गया, बल्कि संस्कृति, इतिहास और विरासत के संरक्षण का जीवंत संदेश देने वाला बड़ा आयोजन साबित हुआ। ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण-संवर्धन के उद्देश्य से संग्रहालय परिसर में विविध सांस्कृतिक, शैक्षिक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों की ऐसी श्रृंखला सजी, जिसने विद्यार्थियों से लेकर शोधार्थियों, कला-प्रेमियों और आम लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे मुख्य अतिथि मदन चंद दुबे ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया। आयोजन के दौरान संग्रहालय परिसर में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में पहुंचे विद्यार्थियों और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों ने कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की सबसे खास झलक ‘भारत के प्रमुख संग्रहालय’ विषय पर आयोजित चित्र प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न संग्रहालयों की ऐतिहासिक धरोहर, कला, पुरातत्व और सांस्कृतिक वैभव को आकर्षक चित्रों व विस्तृत विवरणों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। दर्शकों ने भारतीय सभ्यता के अनछुए पहलुओं को करीब से समझा और संग्रहालयों की उपयोगिता को नए नजरिए से जाना।
इतिहास को तकनीक से जोड़ने की दिशा में संग्रहालय प्रशासन ने एक अहम कदम बढ़ाते हुए हाईटेक कियोस्क का भी शुभारंभ किया। अब संग्रहालय आने वाले पर्यटक कियोस्क के माध्यम से संग्रहालय की जानकारी, पुरावशेषों और महत्वपूर्ण तथ्यों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। आधुनिक तकनीक से लैस यह पहल आगंतुकों के अनुभव को अधिक सरल, रोचक और ज्ञानवर्धक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस मौके पर ‘मथुरा संग्रहालय : एक परिचय’ विषयक लघु फिल्म का ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म में संग्रहालय के गौरवशाली इतिहास, दुर्लभ पुरासंपदा और सांस्कृतिक महत्व को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने फिल्म को गहरी रुचि के साथ देखा और संग्रहालय की विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में ‘संग्रहालय – ज्ञान का वातायन’ विषय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने इतिहास और संस्कृति से जुड़े सवालों के जवाब देकर अपनी जानकारी का परिचय दिया। प्रतियोगिता ने युवाओं में संग्रहालयों के प्रति जिज्ञासा और जागरूकता बढ़ाने का काम किया, वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहित भी किया गया।
समापन अवसर पर संग्रहालय के उप निदेशक योगेश कुमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार जताते हुए कहा कि संग्रहालय सिर्फ प्राचीन वस्तुओं का भंडार नहीं, बल्कि समाज को उसकी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने वाला सशक्त ज्ञान-वातायन है। कार्यक्रम में प्रतिभा द्विवेदी, प्रशांत श्रीवास्तव, अनितेश वार्ष्णेय, रचना और ज्योति सहित अन्य लोगों की मौजूदगी रही।