11 झांकियों और नासिक-मुंबई बैंड ने बांधा समां, जयघोष से गूंजा शहर
मथुरा में रविवार को वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रगौरव के प्रतीक महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पूरे उत्साह, जोश और भव्यता के साथ मनाई गई। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी क्षत्रिय राजपूत वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसने शहर की सड़कों को शौर्य, संस्कृति और सामाजिक एकता के रंग में रंग दिया। हजारों की संख्या में शामिल लोगों के जयघोष, सिर पर सजे साफे और देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल ने पूरे शहर को महाराणा प्रतापमय बना दिया।
शोभायात्रा का शुभारंभ भगत सिंह पार्क, डेम्पियर नगर से हुआ, जहां से यह भरतपुर गेट, होली गेट और विकास मार्केट जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः भगत सिंह पार्क पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा और स्वागत कर श्रद्धा प्रकट की। शहरभर में “महाराणा प्रताप अमर रहें” और वीरता के जयघोष गूंजते रहे।
इस वर्ष शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण महामानव महाराणा प्रताप की भव्य झांकी के साथ निकली 11 आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां रहीं। इनमें भगवान परशुराम, महाराजा अग्रसेन, अहिल्याबाई होल्कर, महर्षि वाल्मीकि और रानी अवंतीबाई की झांकियों ने सामाजिक समरसता और अनेकता में एकता का संदेश दिया। लोगों ने झांकियों के साथ सेल्फी लीं और जयकारों के बीच उनका स्वागत किया।
वहीं दूसरी ओर PSM Band की दमदार प्रस्तुति ने आयोजन को और भव्य बना दिया। ढोल, नगाड़ों और घंटियों की गूंज पर युवा, बुजुर्ग और बच्चे खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। बैंड की धुनों ने पूरे मार्ग को उत्सव स्थल में बदल दिया।
नगर भ्रमण के दौरान कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने स्वागत मंच बनाकर पुष्पवर्षा की और शीतल पेय वितरित किए, जिससे आयोजन में सामाजिक सहभागिता की झलक साफ दिखाई दी।
आयोजन का नेतृत्व क्षत्रिय राजपूत वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, प्रधान, पूर्व जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा और संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं, जिनसे नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।