-शहर की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक स्थल की अनदेखी पर लोगों में नाराजगी
जागरण टुडे, गुड्डू यादव, कासगंज।
शहर के ऐतिहासिक बराहद्वारी क्षेत्र के बीच स्थित घंटाघर आज भी कासगंज की पहचान माना जाता है। वर्षों पुराना यह घंटाघर शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में इसकी स्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। घंटाघर पर फहराया गया तिरंगा झंडा क्षतिविक्षिप्त और बदहाल अवस्था में लहरा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश की शान और सम्मान का प्रतीक है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
बराहद्वारी क्षेत्र के स्थानीय समाजसेवी राहुल मिश्रा और सर्राफा व्यापारी दीपक गुप्ता ने नगर पालिका प्रशासन से जल्द से जल्द तिरंगा बदलवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख स्थल पर लगा राष्ट्रीय ध्वज इस हालत में होना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। प्रतिदिन हजारों लोग घंटाघर के आसपास से गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध लेने की जरूरत नहीं समझी।
समाजसेवी राहुल मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बनाए रखना हर नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थलों पर लगे तिरंगे की समय-समय पर देखरेख होना आवश्यक है। यदि तिरंगा क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे तुरंत बदलना चाहिए, ताकि राष्ट्रध्वज की गरिमा बनी रहे।
दीपक गुप्ता सर्राफ
वहीं व्यापारी दीपक गुप्ता ने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन घंटाघर की देखभाल को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि घंटाघर की साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही है। ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह स्थल उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन तत्काल बदहाल तिरंगे को हटाकर नया राष्ट्रीय ध्वज लगाए और घंटाघर की नियमित देखभाल सुनिश्चित करे, ताकि शहर की पहचान और सम्मान दोनों सुरक्षित रह सकें।