कस्बा गंजडुंडवारा के कादरगंज रोड स्थित तालाब के समीप प्रस्तावित 41 दुकानों के निर्माण के लिए जारी ई-निविदा को नगर पालिका परिषद ने निरस्त कर दिया है। टेंडर निरस्त होने के बाद नगर क्षेत्र में इस मामले की व्यापक चर्चा है। बताया जा रहा है कि भूमि की प्रकृति, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण की वैधता को लेकर उठे सवालों के बाद यह कदम उठाया गया है।
नगर पालिका परिषद द्वारा राज्य वित्त आयोग की धनराशि से वार्ड संख्या-02 स्थित तालाब के पास लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 41 दुकानों के निर्माण हेतु ई-निविदा जारी की गई थी। निविदा प्रकाशित होने के बाद स्थानीय नागरिकों एवं कई जनप्रतिनिधियों ने प्रस्तावित निर्माण स्थल को लेकर आपत्तियां दर्ज करानी शुरू कर दी थीं।
मोहल्ला धनपाल निवासी उदित कुमार विजय ने नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मुनब्बर हुसैन तथा अधिशासी अधिकारी को विस्तृत शिकायत प्रेषित कर निविदा प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित अथवा निरस्त करने की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि जिस भूमि पर निर्माण प्रस्तावित है, वह राजस्व अभिलेखों में तालाब अथवा जलमग्न भूमि के रूप में दर्ज बताई जाती है। साथ ही इस संबंध में कई सभासदों द्वारा भी उच्च स्तर पर शिकायतें भेजे जाने का उल्लेख किया गया था।
शिकायतकर्ता उदित विजय ने अपने पत्र में यह भी कहा था कि नगर पालिका द्वारा जारी निविदा में स्वयं "तालाब के पास" शब्द अंकित किए गए हैं, जिससे निर्माण स्थल का तालाब क्षेत्र से संबंध स्पष्ट होता है। उन्होंने आशंका जताई थी कि प्रस्तावित निर्माण से क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित हो सकती है तथा बरसात के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है।
इसके अतिरिक्त निविदा प्रकाशन की प्रक्रिया, स्थानीय नागरिकों एवं सभासदों से पूर्व चर्चा न किए जाने तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की अनदेखी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे। शिकायत में स्वतंत्र तकनीकी जांच, ड्रेनेज परीक्षण और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन की मांग की गई थी।
जिसके संज्ञान एवं लगातार उठ रही आपत्तियों और बढ़ते विवाद के बाद नगर पालिका परिषद ने उक्त निर्माण कार्य की ई-निविदा निरस्त कर दी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जल संरक्षण और सार्वजनिक उपयोग से जुड़े स्थलों पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण शुरू करने से पूर्व सभी कानूनी, तकनीकी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
टेंडर निरस्त होने के बाद अब कस्बावासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर पालिका परिषद भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर आगे क्या निर्णय लेती है और भविष्य में इस परियोजना को पुनः शुरू किया जाएगा या नहीं।