चादरपोशी, गुलपोशी और महफिल-ए-समा में देर रात तक जुटे रहे जायरीन
रामपुर रोड स्थित आनंद विहार कॉलोनी गेट पर हजरत मुर्तजा हुसैन मोती मियां निजामी नियाजी रहमतुल्लाह अलैह के उर्स और कुल शरीफ के मौके पर अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दिनभर दरगाह परिसर में जायरीन की आवाजाही बनी रही और लोगों ने दरगाह पर हाजिरी देकर मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी।
उर्स की रस्मों की शुरुआत फज्र की नमाज के बाद कुरानखानी से हुई। इसके बाद सुबह गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की गई। मजारे मुबारक पर संदल पेश कर सलातो-सलाम पढ़ा गया और बुजुर्ग की बारगाह में अकीदत के फूल पेश किए गए। इस दौरान दरगाह परिसर में रूहानी माहौल बना रहा।
शाहदाना वली वेलफेयर सोसाइटी के संरक्षक अब्दुल वाजिद खान नूरी, गुल्लन खान, मिर्जा शाहब बेग, मिर्जा मुकर्रम बेग और निसार पहलवान समेत कई गणमान्य लोगों ने दरगाह पर चादरपोशी और गुलपोशी की। उन्होंने देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की।
दोपहर बाद नमाज-ए-जोहर के पश्चात महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ, जिसमें फनकार आरिफ नियाजी और तस्लीम नियाजी ने सूफियाना कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। सूफी कलामों और नातिया पेशकशों पर अकीदतमंद झूम उठे। कार्यक्रम में बुजुर्गों की शिक्षाओं, इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे के संदेश पर भी प्रकाश डाला गया।
खानकाह निजामिया के सज्जादानशीन हजरत पाशा मियां निजामी ने कुल शरीफ की रस्म अदा कर फातिहा पढ़ी। उन्होंने मुल्क की तरक्की, आपसी सौहार्द, बीमारों की शिफा, बेरोजगारों को रोजगार और बेऔलाद दंपतियों को संतान की नेमत मिलने की दुआ की। इसके बाद मौजूद लोगों में लंगर का तबर्रुक वितरित किया गया।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी, सैफ वली खान, अलीम खान सुल्तानी, नदीम इकबाल, अरबाज खान समेत विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी दरगाह पहुंचकर चादरपोशी की और दुआ-ए-खैर की। कार्यक्रम के दौरान अब्दुल वाजिद खान उर्फ बब्बू मियां ने अतिथियों की दस्तारबंदी कर उर्स की मुबारकबाद दी। उर्स के सभी कार्यक्रम खानकाह निजामिया के गद्दीनशीन हजरत पाशा मियां की सरपरस्ती में संपन्न हुए।
मीडिया प्रभारी वसी अहमद वारसी ने बताया कि उर्स के अगले चरण में हजरत गौस अली शाह जलाली उर्फ कोड़ा शाह बाबा के कुल शरीफ की रस्म भी अदा की जाएगी। उन्होंने बताया कि उर्स में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत कर बुजुर्ग की बारगाह में अकीदत पेश की।