ब्रज की पौराणिक धरोहरों, कुंडों, वनों और गिरिराज परिक्रमा क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास को नई गति देने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और हार्टफुलनेस फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थाओं के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, हरियाली बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।
बैठक से पहले हार्टफुलनेस फाउंडेशन के वैश्विक मार्गदर्शक एवं पद्मभूषण सम्मानित डॉ. कमलेश डी. पटेल (दाजी) ने परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मंडलायुक्त आगरा नगेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह तथा अन्य अधिकारियों के साथ गोवर्धन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने गिरिराज पर्वत की हरियाली, परिक्रमा मार्ग और विभिन्न पौराणिक कुंडों का निरीक्षण कर पर्यावरण-अनुकूल और श्रद्धालु हितैषी विकास योजनाओं पर चर्चा की।
इसके बाद परिषद सभागार में आयोजित बैठक में उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि ब्रज की आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए हार्टफुलनेस फाउंडेशन का सहयोग महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने बताया कि संस्था देश-विदेश में पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है, जिसका लाभ अब ब्रज क्षेत्र को भी मिलेगा।
बैठक में परिषद के ईको-रेस्टोरेशन प्रभारी मुकेश शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि ब्रज क्षेत्र में 746 विरासत स्थल, 231 कुंड और 137 पौराणिक वन चिन्हित किए गए हैं। इन धरोहरों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए आठ प्रमुख बिंदुओं पर आधारित संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जा रही है। परिषद द्वारा अब तक 165 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनमें 115 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने कहा कि मथुरा जनपद में लगभग दो हजार तालाब, पोखर और अन्य जलाशय मौजूद हैं। इनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए वाटर म्यूजियम स्थापित करने की योजना को भी महत्वपूर्ण बताया।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। वहीं हार्टफुलनेस फाउंडेशन के वैश्विक मार्गदर्शक दाजी ने कहा कि संस्था ब्रज में जल संरक्षण, जल शोधन, वन पुनर्जीवन और ध्यान आधारित सामाजिक विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए परिषद के साथ दीर्घकालिक परियोजनाओं पर कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। ब्रज की आध्यात्मिक पहचान और प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
इन 8 बिंदुओं पर बनी सहमति
- गिरिराज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरियाली और ईको-रेस्टोरेशन।
- गोविंद कुंड, गंधर्व कुंड, सुरभि कुंड और नारद कुंड का जल शोधन व रखरखाव।
- राधाकुंड, श्यामकुंड, जतीपुरा कुंड और अष्टसखी कुंड का सौंदर्यीकरण व संरक्षण।
- उद्धव क्यारी कुंड और दोमिल कुंड का पुनर्जीवन।
- टेंटीगांव के जाकवारी मंदिर तालाब को आदर्श कुंड के रूप में विकसित करना।
- वंशीवट, करहला-छाहरी समेत पौराणिक वनों का संरक्षण और पुनर्जीवन।
- अकबरपुर और बरसाना में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) का संचालन।
- वाटर म्यूजियम के माध्यम से जल संरक्षण और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम।