मोती पार्क मल्टी लेवल कार पार्किंग में वित्तीय अफसरों की मिलीभगत
बरेली। नगर क्षेत्र में संचालित स्मार्ट सिटी परियोजनाएं किसी न किसी विवाद और वित्तीय घोटाले में फंसती नजर आ रही हैं। अभी फूड कोर्ट मामला थमा नहीं कि घंटाघर मोती पार्क में बनी मल्टी लेवल कार पार्किंग में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है। बताया जाता है नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़े वित्तीय अफसरों की मिलीभगत से तमाम घोटाले हुए हैं, जो धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। मामला लीपापोती करने के लिए फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही ठेकेदार फर्म से वसूली करने और एफआईआर कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने घंटाघर मल्टी लेवल पार्किंग संचालन, रखरखाव और पार्किंग प्रबंधन का तीन वर्ष का अनुबंध 18 नवंबर 2024 को ठेकेदार फर्म के साथ किया गया था। शर्तों के अनुसार फर्म को निर्धारित लाइसेंस फीस और विद्युत बकाया का नियमित भुगतान करना था, लेकिन बार-बार नोटिस और मौखिक निर्देशों के बावजूद ठेकेदार फर्म ने भुगतान नहीं किया। अनुबंध अवधि के लगभग 18 महीने बीत जाने के बाद भी फर्म ने जीएसटी सहित 46.84 लाख रुपये बकाया राशि जमा नहीं की है। फर्म ने सरकारी परियोजना का संचालन करते हुए राजस्व का भुगतान नहीं किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है।
ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, एफआईआर होगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। साथ ही संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि राजस्व की वसूली के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के निर्देश पर परियोजना को सुरक्षित रूप से वापस लेने और बकाया वसूली के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिसमें संयुक्त नगर आयुक्त, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, अधिशासी अभियंता, नोडल अधिकारी बरेली स्मार्ट सिटी के अधिकारी शामिल है। कमेटी को परियोजना की कमियों का आकलन कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजनाओं पर सवाल
स्मार्ट सिटी से संबंधित ज्यादातर परियोजनाएं किसी न किसी विवाद में फंसी हुई हैं। घंटाघर स्थित मल्टी लेवल कार पार्किंग स्मार्ट सिटी की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या दूर करने के उद्देश्य से इसे विकसित किया गया था। अब संचालन एजेंसी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद परियोजना की निगरानी और अनुबंध व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्मार्ट सिटी की करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में अनुबंधों की निगरानी और राजस्व वसूली को लेकर यह मामला बड़ा संकेत माना जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब महीनों से भुगतान नहीं हो रहा था तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई। अब जांच और वसूली की प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।