Friday, June 19, 2026

KASGANJ: गंजडुंडवारा नगर पालिका प्रशासन का बडा कारनामा, कागजो में बिछ गई पाइप लाइन, धरातल पर नहीं मिला काम; 8.08 लाख रुपये भुगतान पर उठे सवाल

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: June 18, 2026

KASGANJ: गंजडुंडवारा नगर पालिका प्रशासन का बडा कारनामा, कागजो में बिछ गई पाइप लाइन, धरातल पर नहीं मिला काम; 8.08 लाख रुपये भुगतान पर उठे सवाल

जागरण टुडे, कासगंज

नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट के आरोपों के बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जागरण टुडे की पड़ताल में वार्ड संख्या-25 में 110 एमएम पीवीसी पाइप लाइन बिछाने के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य के लिए 8.08 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, उसका धरातल पर कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी खजाने से भुगतान किस आधार पर कर दिया गया।

प्राप्त अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2024 में 15वें वित्त आयोग मद से वार्ड संख्या-25 में अख्तर के घर से अंसार के घर तक, हासिम भाई से फारूख के घर तक तथा पप्पू के घर से अतीक के घर तक 110 एमएम पीवीसी पाइप लाइन बिछाने का कार्य स्वीकृत किया गया था। नगर पालिका की भुगतान पुस्तिका के मुताबिक इस कार्य के लिए 7,15,212 रुपये का बिल तैयार हुआ, 6,79,452 रुपये का शुद्ध भुगतान किया गया तथा जीएसटी सहित कुल 8,08,190 रुपये की धनराशि 13 दिसंबर 2024 को मैसर्स तमन्ना कंस्ट्रक्शन के पक्ष में जारी कर दी गई।

लेकिन जब जागरण टुडे की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की, तो तस्वीर कागजी दावों से बिल्कुल अलग नजर आई। संबंधित स्थानों पर पाइप लाइन कार्य के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। स्थानीय लोगों ने भी कार्य न होने की बात कही। ऐसे में यह आशंका और गहरा गई है कि कहीं सरकारी धन निकालने के लिए कागजों में ही विकास कार्य तो नहीं दिखा दिया गया।

मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब एक कस्बावासी ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार, अवर अभियंता, संबंधित तत्कालीन पटल लिपिक, चेयरमैन मुनब्बर हुसैन तथा कार्यदायी संस्था की भूमिका को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि मौके पर पाइप लाइन का कार्य नहीं हुआ है और इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। शिकायत में मापन पुस्तिका (एमबी), कार्यादेश, भुगतान अभिलेख, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

नगर पालिका के विकास कार्यों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस मामले ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कागजों में पाइप लाइन बिछाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, या फिर जांच में कोई और सच्चाई सामने आएगी? फिलहाल लोगों की निगाहें शासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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