बदायूं। कोतवाली उझानी क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुराव नगला के बुटला दौलत निवासी उमेश पुत्र भगवंत की पत्नी सिन्धू के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। परिजनों के मुताबिक सिन्धू की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह 29 जुलाई 2026 की रात करीब 9:30 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई। काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं लग सका। मामले में पीड़ित पति ने पुलिस से पत्नी की तलाश कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
उमेश का कहना है कि पत्नी के घर से जाने के बाद उसने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों तथा संभावित स्थानों पर काफी तलाश की, लेकिन सिन्धू का कहीं पता नहीं चला। पीड़ित के अनुसार उसके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं और पत्नी के लापता होने के बाद परिवार बेहद परेशान है। उमेश का आरोप है कि वह कई दिनों से कोतवाली उझानी के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पीड़ित ने गून्दरा गंज मजरा बुटला दौलत निवासी ज्ञान सिंह पुत्र बदन सिंह तथा उसके दामाद जयकांत पुत्र सरवन निवासी ग्राम मनकापुर, थाना सोरों, जिला कासगंज पर पत्नी को कहीं गायब किए जाने की आशंका जताई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पीड़ित का कहना है कि उसकी पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी तलाश कराई जानी चाहिए।
उमेश ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका आरोप है कि मामले की जांच से जुड़े हल्का दरोगा और हल्का सिपाही उसके घर पहुंचकर उसके साथ गाली-गलौज और धमकी देते हैं। पीड़ित का यह भी आरोप है कि उससे ओटीपी मांगने का दबाव बनाया जाता है। उमेश का कहना है कि पत्नी की तलाश और शिकायत पर कार्रवाई कराने के बजाय उसे ही परेशान किया जा रहा है।
पीड़ित के मुताबिक उसने मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अभी तक उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली है। पत्नी के लापता होने और चार छोटे बच्चों की जिम्मेदारी के बीच उमेश लगातार अधिकारियों के कार्यालयों और थाने के चक्कर लगाने को मजबूर है।
पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उसकी पत्नी सिन्धू की तलाश कराई जाए तथा उसके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करते हुए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं, इस संबंध में थाना प्रभारी से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद खबर में उसे भी शामिल किया जा सकता है।