रोजा बस अड्डे पर रोजाना आने वाली बसों की औसत संख्या 60, यात्रियों की संख्या महज 10 बताई जा रही; नगर निगम के इलेक्ट्रिक वाहन भी खड़े-खड़े हो रहे कबाड़
जागरण टुडे। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोजा में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से सैटेलाइट बस अड्डा तैयार किया गया। हालांकि, यहां यात्रियों की संख्या बेहद कम होने की जानकारी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बस अड्डे पर प्रतिदिन औसतन 60 बसें आती हैं, जबकि सफर करने वाले यात्रियों की औसत संख्या महज 10 है। ऐसे में बस अड्डे के उपयोग, बसों के संचालन और रोडवेज के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बस अड्डे के पीछे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाया गया है। रोडवेज बस अड्डे पर भी इसी तरह की सुविधा विकसित की गई है, लेकिन दोनों स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन के संचालन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, नगर निगम के इलेक्ट्रिक वाहन भी नियमित इस्तेमाल के अभाव में खड़े होने और उनकी देखरेख को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
12 करोड़ खर्च, फिर भी यात्रियों की संख्या कम
रोजा स्थित सैटेलाइट बस अड्डे का निर्माण यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और बस संचालन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन यहां यात्रियों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने की बात सामने आ रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रतिदिन औसतन 60 बसों का आवागमन होता है, जबकि यात्रियों की औसत संख्या करीब 10 बताई जा रही है।
यदि यात्रियों की संख्या इतनी कम है, तो बस अड्डे के संचालन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं की समीक्षा जरूरी हो जाती है। बसों के आवागमन, कर्मचारियों की तैनाती और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च के मुकाबले कितनी आय हो रही है, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
हालांकि, यात्रियों की संख्या और बसों के संचालन से जुड़े इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि तथा विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है। ऐसे में बस अड्डे की वास्तविक उपयोगिता का आकलन करने के लिए यात्रियों की संख्या, बसों के ठहराव और राजस्व से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा जरूरी है।
चार्जिंग स्टेशन तैयार, संचालन का इंतजार
सैटेलाइट बस अड्डे के ठीक पीछे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है। इसी तरह का चार्जिंग स्टेशन रोडवेज बस अड्डे पर भी तैयार किया गया है। इन सुविधाओं का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की व्यवस्था उपलब्ध कराना और परिवहन के क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
लेकिन दोनों स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन का नियमित संचालन कब शुरू होगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बुनियादी ढांचा तैयार होने के बावजूद यदि उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो सार्वजनिक धन से विकसित की गई सुविधा का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।
ऐसे में संबंधित विभागों को चार्जिंग स्टेशनों की वर्तमान स्थिति, बिजली कनेक्शन, तकनीकी तैयारियों और संचालन संबंधी बाधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इन सुविधाओं को नियमित रूप से चालू करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
नगर निगम के इलेक्ट्रिक वाहन भी खड़े-खड़े हो रहे खराब
शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और नगर निगम की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए खरीदे गए वाहनों की स्थिति भी चिंता का विषय बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ वाहन नियमित उपयोग के अभाव में लंबे समय से खड़े हैं और उनकी हालत खराब होती जा रही है।
यदि वाहनों की खरीद पर सरकारी धन खर्च किया गया है, तो उनका नियमित संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करना भी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। वाहनों के खड़े रहने से न केवल संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता, बल्कि समय के साथ उनके खराब होने और मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च आने की आशंका भी रहती है।
ऐसे में नगर निगम को इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति, संचालन में आ रही बाधाओं और रखरखाव की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने वाहन उपयोग में हैं और कितने वाहनों को दोबारा संचालन योग्य बनाने की जरूरत है।
सुविधाओं के इस्तेमाल पर उठ रहे सवाल
रोजा के सैटेलाइट बस अड्डे, दोनों चार्जिंग स्टेशनों और नगर निगम के इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति को देखते हुए बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ उसके प्रभावी इस्तेमाल पर भी ध्यान देने की जरूरत है। किसी सुविधा का निर्माण तभी सार्थक है, जब उसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे और सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो।
अब सवाल यह है कि सैटेलाइट बस अड्डे पर यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए क्या योजना बनाई गई है, चार्जिंग स्टेशन कब नियमित रूप से चालू होंगे और नगर निगम के इलेक्ट्रिक वाहनों को उपयोग में लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। संबंधित विभागों की ओर से इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इन सुविधाओं की वास्तविक उपयोगिता का आकलन हो सकेगा।