बदायूं। मूसाझाग-समरेर ब्लॉक के गांव मानिकपुर कौर स्थित अस्थायी गौशाला में भारी बारिश के बीच कथित अव्यवस्थाओं को लेकर हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने दावा किया है कि पिछले 48 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश के दौरान गौशाला में पानी भरने और पर्याप्त व्यवस्थाएं न होने के कारण आठ गायों की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार बारिश के कारण गौशाला परिसर में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। गायों के बैठने के लिए पर्याप्त सूखी जगह उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा पशुओं के लिए भूसे की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और कथित अव्यवस्थाओं के बीच पशुओं की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय रहते समुचित इंतजाम नहीं किए गए।
मामले में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कथित रूप से गायों की मौत के बाद पशु चिकित्सक की टीम को मौके पर बुलाए बिना और पोस्टमार्टम कराए बिना ही जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर शवों को गौशाला परिसर में दफना दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से मौत के वास्तविक कारणों की जांच प्रभावित हो सकती है।
गायों की मौत और शवों को कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम दफनाए जाने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, गौशाला में पशुओं की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में रह रहे पशुओं की सुरक्षा और भोजन-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना जिम्मेदारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में बारिश के दौरान गौशाला में जलभराव, सूखी जगह और चारे की कथित कमी जैसे सवालों की जांच जरूरी है।
मामले में ग्राम प्रधान का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी ने बताया कि उन्हें मामले की सूचना मिली है और टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि गायों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामला जांच के घेरे में है और ग्रामीण कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।