जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कासगंज। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की कासगंज तहसील इकाई ने लेखपाल संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। संघ ने वेतन विसंगति दूर करने, 2800 ग्रेड पे लागू करने, अंतर्मंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति सूची जारी करने समेत आठ प्रमुख मांगों पर शासन स्तर से शीघ्र निर्णय की मांग की है। मांगों पर प्रभावी कार्रवाई न होने पर प्रदेश के लेखपालों ने 17 अक्टूबर 2026 से संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करने की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में संघ ने कहा कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की आधारशिला हैं और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, किसान हित से जुड़े कार्यों, राजस्व अभिलेखों के अद्यतन, वरासत, नामांतरण, पैमाइश, ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था समेत अनेक कार्यों का दायित्व निभा रहे हैं। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं।
संघ की पहली प्रमुख मांग 2800 ग्रेड पे और वेतन विसंगति दूर करने की है। ज्ञापन के अनुसार इस संबंध में 13 नवंबर 2017 को पत्र भेजा गया था। 19 अगस्त 2026 के पत्र के क्रम में लेखपाल संवर्ग के बढ़ते कार्य और दायित्वों को देखते हुए प्रारंभिक वेतनमान लेवल-5 यानी 2800 ग्रेड पे तथा वेतन विसंगति दूर करने की संस्तुति की गई थी, लेकिन अभी तक शासन स्तर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।
दूसरी मांग अंतर्मंडलीय स्थानांतरण की है। संघ का कहना है कि वर्ष 2019 में करीब 650 लेखपालों का गृह मंडल में स्थानांतरण हुआ था। इसके बाद 16 मई 2025 को राजस्व परिषद का पोर्टल खोलकर 2669 लेखपालों से आवेदन लिए गए, लेकिन इन आवेदनों पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई। संघ के अनुसार करीब 2700 लेखपाल वर्तमान में अपने गृह जनपद या गृह मंडल से 400 से 800 किलोमीटर दूर कार्यरत हैं। राजस्व परिषद के दो अगस्त 2026 के कार्यवृत्त के बावजूद स्थानांतरण प्रक्रिया लंबित होने की बात कहते हुए पोर्टल दोबारा खोलने की मांग की गई है।
तीसरी मांग चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची जारी करने की है। संघ के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्यवाही 29 अप्रैल 2026 को पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद पदोन्नति सूची जारी नहीं हुई। संघ ने लंबित सूची तत्काल जारी कर पदोन्नति का लाभ देने की मांग की है।
चौथी मांग चयन वर्ष 2024 के नवनियुक्त लेखपालों की विभागीय प्रशिक्षण परीक्षा का परिणाम और प्रमाणपत्र जारी करने की है। संघ के अनुसार प्रशिक्षण परीक्षा 13 सितंबर 2025 को हो चुकी है, लेकिन करीब एक साल बाद भी सभी जनपदों को परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं। इससे नवनियुक्त लेखपालों के स्थायीकरण में भी विलंब हो रहा है। संघ ने परीक्षा परिणाम और प्रमाणपत्र शीघ्र जारी करने की मांग की है।
पांचवीं मांग भत्तों में बढ़ोतरी की है। संघ ने कहा कि लंबे समय से भत्तों में वृद्धि नहीं हुई है, जबकि महंगाई और क्षेत्रीय कार्यों पर होने वाला खर्च बढ़ चुका है। संगठन ने स्टेशनरी भत्ता 100 से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिमाह, मोटरसाइकिल/वाहन भत्ता 1500 रुपये प्रतिमाह तथा विशेष भत्ता 100 से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह करने के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने की मांग की है।
छठी मांग भूलेख कार्यालयों और विभिन्न पटलों पर सम्बद्ध लेखपालों को अवमुक्त करने की है। संघ का आरोप है कि परिषद के आदेश के बावजूद कई स्थानों पर लेखपालों से पटल सहायक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक का कार्य लिया जा रहा है। इससे उनके मूल राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं और अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है। संघ ने परिषद के दो अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार ऐसे लेखपालों को तत्काल अवमुक्त करने की मांग की है।
सातवीं मांग ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की ड्यूटी लगाने से पहले आधारभूत सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की है। संघ का कहना है कि अधिकांश ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के लिए अलग कक्ष, फर्नीचर, सुरक्षित अभिलेख कक्ष, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। एक लेखपाल के पास चार से पांच गांवों का कार्यक्षेत्र होने के कारण एक ही स्थान पर बैठकर सभी गांवों के कार्यों का समय से निस्तारण भी संभव नहीं है।
ज्ञापन में 20 अगस्त 2026 को तहसील सोहावल, अयोध्या में पंचायत भवन में कार्य कर रहे लेखपाल के खिलाफ एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। संघ ने कहा कि इस घटना के बाद लेखपाल संवर्ग में भय और चिंता का माहौल है। संगठन ने ग्राम सचिवालयों में कार्य करने वाले लेखपालों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
आठवीं मांग लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने की है। संघ ने कहा कि लेखपाल लगातार ऑनलाइन और तकनीकी कार्य कर रहे हैं। ऐसे में पद को तकनीकी घोषित करने के साथ ही उच्च तकनीकी संसाधन के रूप में लैपटॉप और मोबाइल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
संघ ने ज्ञापन में कहा कि लंबे समय से मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण लेखपाल संवर्ग आंदोलित है। यदि शासन और राजस्व परिषद स्तर से मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो 17 अक्टूबर से प्रदेश के समस्त लेखपाल चरणबद्ध तरीके से संपूर्ण कार्य बहिष्कार के लिए विवश होंगे। संघ ने कहा कि आंदोलन के दौरान प्रशासनिक कार्यों में रुकावट या आमजन को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी।
ज्ञापन तहसील अध्यक्ष राहुल सिंह और तहसील मंत्री जितेंद्र सिंह सहित सभी लेखपालो की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए उपजिलाधिकारी के माध्यम से दिया गया।