सप्ताहभर से जलमग्न सिढ़पुरा पीएचसी में सड़क किनारे ओपीडी और टीकाकरण, इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित; तीन दिन की बोरिंग भी नहीं हुई सफल
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
सिढ़पुरा। बारिश का मौसम आते ही सिढ़पुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर साल बारिश के बाद पीएचसी परिसर में पानी भरता है और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके बावजूद स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस बार भी पिछले सप्ताह हुई बारिश का गंदा पानी सप्ताहभर बाद भी पीएचसी परिसर से नहीं निकल सका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब समस्या हर साल सामने आती है तो उसके स्थायी समाधान के लिए समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? क्या प्रशासन को हर बार बारिश के बाद ही पीएचसी के जलमग्न होने का इंतजार रहता है।
हालात इतने खराब हैं कि सोमवार से शनिवार तक ओपीडी का संचालन सड़क किनारे करना पड़ रहा है। शनिवार को बच्चों का टीकाकरण भी स्वास्थ्य केंद्र के अंदर होने के बजाय सड़क किनारे कराया गया। जिस परिसर में मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए, वहां बारिश का गंदा पानी भरा होने के कारण मरीज और तीमारदार बाहर इलाज कराने को मजबूर हैं। सड़क किनारे बैठकर ओपीडी और टीकाकरण की तस्वीरें स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
इमरजेंसी तक प्रभावित, गंभीर मरीज हो रहे रेफर
पीएचसी परिसर में जलभराव का असर सिर्फ ओपीडी तक सीमित नहीं है। आपातकालीन यानी इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित चल रही हैं। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए 108 एंबुलेंस की मदद से अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के सामने बेहतर और समय पर उपचार के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करने की मजबूरी है।
बारिश का पानी एक-दो दिन में निकल जाए तो बात अलग है, लेकिन यहां सप्ताहभर से गंदा पानी जमा है। सवाल यह है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर जलनिकासी की ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है कि बारिश का पानी समय रहते बाहर निकल सके। अगर इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीज और गर्भवती महिलाएं भी जलभराव के कारण दूसरे केंद्रों पर भेजी जा रही हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय कौन करेगा?
तीन दिन से बोरिंग, फिर भी पानी निकालने का रास्ता नहीं
जलभराव की समस्या के समाधान के लिए मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर बीडीओ सिढ़पुरा की ओर से पिछले तीन दिनों से पीएचसी परिसर में बोरिंग कराने का काम कराया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बोरिंग के माध्यम से पानी को भूमिगत किया जा सके। लेकिन शनिवार तक कराई गई एक भी बोरिंग सफल नहीं हो सकी। ऐसे में तीन दिन की कवायद के बाद भी पीएचसी परिसर में भरा पानी जस का तस है और स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य संचालन का रास्ता साफ नहीं हो सका है।
बारिश हर साल आती है, फिर इंतजाम बारिश के बाद ही क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पीएचसी में जलभराव की समस्या हर साल सामने आती है तो बारिश से पहले जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? नाले-नालियों की सफाई, पानी की निकासी का रास्ता और परिसर के जलस्तर को देखते हुए आवश्यक इंतजाम पहले से क्यों नहीं किए जाते? हर साल बारिश के बाद समस्या सामने आने और फिर आनन-फानन में समाधान तलाशने की स्थिति आखिर कब तक चलती रहेगी?
स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज प्रभावित होने के बाद सक्रिय होने के बजाय प्रशासन पहले से ऐसी स्थिति से निपटने की तैयारी क्यों नहीं करता, यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि समस्या बार-बार सामने आने के बावजूद यदि उसका स्थायी समाधान नहीं किया जाता तो हर बारिश में मरीजों को इसी तरह परेशानी उठानी पड़ेगी।
सड़क किनारे इलाज की तस्वीर व्यवस्था से मांग रही जवाब
पीएचसी में पानी और सड़क किनारे ओपीडी व टीकाकरण की स्थिति सिर्फ जलभराव की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के पानी की स्थायी निकासी का इंतजाम किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में मरीजों को अस्पताल के बाहर सड़क किनारे इलाज कराने की नौबत न आए।
एक सप्ताह से पीएचसी परिसर में गंदा पानी भरा है, इमरजेंसी प्रभावित है, गंभीर मरीज और गर्भवती महिलाएं रेफर हो रही हैं, ओपीडी सड़क किनारे चल रही है और बच्चों का टीकाकरण भी बाहर करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—जब समस्या हर साल आती है तो प्रशासन आखिर कब जागेगा, क्या किसी स्थायी समाधान के लिए अगली बारिश का इंतजार किया जाएगा?