पटियाली, राहुल गुप्ता। विजयादशमी उत्सव के अवसर पर पटियाली नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन निकाला गया। इसमें सैकड़ों स्वयंसेवकों ने उत्साह और अनुशासन के साथ सहभागिता की। पथ संचलन से पूर्व जिला प्रचारक आर्येंद्र ने बौद्धिक के माध्यम से सामाजिक एकता, समरसता और राष्ट्र के प्रति नागरिकों के दायित्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जब समाज संगठित और समरस होता है, तभी राष्ट्र उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता है।
आर्येंद्र ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में अशांति और संघर्ष का वातावरण है, लेकिन भारत अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और उत्सवों को शांति एवं सौहार्द के साथ मना रहा है। यह भारत के सामाजिक चिंतन और सांस्कृतिक मूल्यों का परिचायक है। भारत की व्यवस्था अराजकता पर नहीं, बल्कि शांति, न्याय और सामाजिक सद्भाव पर आधारित है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के बीच परस्पर विश्वास, सहयोग और समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जेन-जी एक जिम्मेदार पीढ़ी है। युवा अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए देश के समग्र उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं में सामाजिक चेतना, अनुशासन, सकारात्मक दृष्टिकोण और कर्तव्यबोध का होना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से समाज को जोड़ने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर कार्य करने का आह्वान किया।
बौद्धिक के बाद स्वयंसेवक मुख्य चौराहे से होते हुए मुख्य बाजार की ओर पथ संचलन के लिए निकले। घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों ने नगर में अनुशासन, संगठन और एकजुटता का संदेश दिया। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों का सामूहिक कदमताल और अनुशासित पंक्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरे इस संचलन में सामाजिक एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दिया।
इस अवसर पर भास्कर, सुमित दीक्षित, कौशल चौहान, रूबल गुप्ता, विष्णु चौहान, नगर व्यवस्था प्रमुख प्रतीक, अवधेश पांडेय, अवनीश दीक्षित, मंजीत राठौर, दीपक तिवारी, अंबुज द्विवेदी, अंशु दिवाकर, यशवर्धन मिश्रा, रामकुमार श्रोतिय सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।