मथुरा। गुरुग्राम में एक गांव है, जहां भगवान झूलेलाल ने तप किया था। इस गांव में करीब तीन सौ साल पुराना भगवान झूलेलाल का मंदिर है, इससे मथुरा का सिंधी समाज बिल्कुल अंजान था। इस गांव में एक भी सिंधी परिवार नहीं रहता है। दशकों से इस गांव में रहने वाला गुर्जर समाज भगवान झूलेलाल की उपासना करता आ रहा है।
सिंधी समाज मथुरा के मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि गुरुग्राम के सोहना में सांप की नंगली पहाड़ पर झूलेलाल वरुणदेव का एक प्राचीन सिद्धपीठ तपोभूमि पावन नंगली धाम है, जो तीन सौ साल से भी ज्यादा पुराना है, लेकिन सिंधी समाज इससे अंजान था। दो साल पहले सोशल मीडिया पर यहां का एक वीडियो वायरल होने के बाद सबको इसका पता चला और तब से कई शहरों के सिंधीजन नंगली धाम पहुंच रहे हैं।
महाभारत काल से नंगली तपोभूमि का संबंध
मथुरा के सिंधीजन भी पंडित मोहनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में मंगलवार को पहली बार झूलेलाल तपोभूमि पहुंचे और भगवान झूलेलाल की अखंड ज्योति के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। नंगली धाम के गद्दीश्वर लोकेश का शॉल और माला पहनाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। गद्दीश्वर लोकेश ने बताया कि सांप की नंगली तपोभूमि का संबंध महाभारत काल से है, तब यहां विशाल जंगल हुआ करता था, जिसमें गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्यों पांडवों और कौरवों को शिक्षा देते थे।
झूलेलाल के चमत्कार सुन अचंभित हुए लोग
भगवान झूलेलाल ने सिंध प्रांत से अंतर्ध्यान होकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में कई स्थानों पर लोगों को दर्शन दिए और फिर इसी स्थान को वरूणावतार झूलेलाल ने तप के लिए चुना। तब से यह नंगली धाम झूलेलाल तपोभूमि बन गई। तपोभूमि से जुड़ी कहानी और भगवान झूलेलाल के अनगिनत चमत्कारों के प्रसंग सुनकर सिंधीजन अचम्भित हो गए।
मथुरा से ये लोग गए दर्शन करने
मथुरा से सिंधी समाज के झामनदास नाथानी, रमेश नाथानी, किशोर इसरानी, गिरधारी नाथानी, अनिल मंगलानी, अशोक डाबरा, धनराज नाथानी, लेखराज काकू लछवानी, जितेंद्र भाटिया, गीता नाथानी, एडवोकेट अनिता चावला, राखी भाटिया, पूनम शर्मा, ज्योति भाटिया, कंचन मंगलानी आदि नंगली धाम का दर्शन करने गए थे। सभी मंगलवार देर रात मथुरा लौट आए।