बरेली। 21 सितंबर को विश्व शांति दिवस (International Day of Peace) मनाया जाता है। यह दिन पूरी दुनिया में शांति और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1981 में इसकी स्थापना की थी। इसका उद्देश्य सभी देशों और लोगों के बीच शांति के आदर्शों को मजबूत करना और हिंसा व युद्ध की अनुपस्थिति का प्रतीक बनाना है।
इस दिन की सबसे खास परंपरा न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पीस बेल (शांति घंटी) बजाना है। यह घंटी विश्वभर के बच्चों द्वारा दान किए गए सिक्कों से बनाई गई है और यह शांति के महत्व का प्रतीक है।
शांति का वास्तविक अर्थ
विश्व शांति दिवस केवल युद्ध न होने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ऐसी दुनिया की कल्पना करता है जहाँ हर व्यक्ति भय और अभाव से मुक्त होकर सम्मान और न्याय के साथ जीवन जी सके। सच्ची शांति तभी संभव है जब समाज में समानता, न्याय और मानवाधिकारों का सम्मान हो।
आज संघर्ष केवल हथियारों से नहीं, बल्कि गरीबी, भेदभाव, पर्यावरणीय विनाश और राजनीतिक अत्याचार के रूप में भी सामने आ रहे हैं। इसके उदाहरण हाल ही में श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, फ्रांस, साउथ कोरिया, अमेरिका, इंडोनेशिया, सूडान, ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन, नेपाल और भारत के मणिपुर में देखे जा सकते हैं।
युवाओं की भूमिका
शांति स्थापना में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, नवाचार और जागरूकता के माध्यम से वे समाज में सहिष्णुता और सद्भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। इस अवसर पर हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम एक ऐसी दुनिया का निर्माण करेंगे जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, सुरक्षा और सौहार्द के साथ जीवन जी सके।
✍ संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन