रसखान समाधि परिसर पर चल रहे सांझी महोत्सव-2025 के चतुर्थ दिवस पर एक ऐतिहासिक प्रस्तुति हुई। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में पहली बार सांझी पर आधारित नौटंकी का मंचन किया गया।
यह अद्वितीय प्रस्तुति गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन की प्रशिक्षु बालिकाओं ने दी। नौटंकी की परिकल्पना और लेखन परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा द्वारा किया गया, जबकि निर्देशन का दायित्व गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना ने निभाया।
संयोजन का कार्य संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। मंच पर सुमिति भारद्वाज, चांदनी, समीक्षा, तनिष्का, वैष्णवी, वैभवी, दीक्षा, रोशनी, आकांक्षा, मोनिका, निर्जला और डोली ने मनोहारी अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।
संगीत संयोजन में मनमोहन कौशिक, सुनील शर्मा, सुनील पाठक और आकाश शर्मा का सहयोग रहा। वस्त्र विन्यास रितु सिंह ने किया और नगाड़े पर अकील अहमद ने संगति दी। नौटंकी गुरु होती लाल पांडेय रहे। इस विशेष मंचन का शुभारंभ ग्वालियर के जिला जज ललित मोहन गर्ग ने किया, जो सांझी महोत्सव का आनंद लेने विशेष रूप से रसखान समाधि पधारे थे।
संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि यह सांस्कृतिक इतिहास में पहला अवसर है जब सांझी कला पर आधारित नौटंकी लिखी और मंचित की गई। कार्यक्रम में गुजरात सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए तीर्थयात्रियों ने भाग लिया। उन्होंने सांझी निर्माण कर रहे कलाकारों से भेंट की और ब्रज की इस अनूठी परंपरा में गहरी रुचि व्यक्त की।