त्योहारों के सीजन में मिलावटखोरी का काला कारोबार एक बार फिर उजागर हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में खुलासा हुआ कि पिछले वर्ष दिवाली के दौरान लिए गए 38 खाद्य नमूनों में से 32 नमूने फेल हो गए। इनमें दूध, खोया, पनीर, घी, लड्डू, नमकीन और चाय पत्ती जैसे रोजमर्रा के उपयोग वाले उत्पाद शामिल हैं।
एफएसडीए ने दोषी दुकानदारों के खिलाफ 32 मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अधिकांश नमूने या तो मानक के विपरीत पाए गए या अधोमानक श्रेणी में थे, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सहायक आयुक्त (खाद्य) चंद्रशेखर मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष दिवाली से पहले जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए गए थे। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अधिकतर नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे।
इन खाद्य पदार्थों में पाई गई मिलावट
दूध, खोया, पनीर, घी, बूंदी लड्डू, छेना, लौंज, मिल्क केक, वनस्पति, नमकीन, चाय पत्ती, पान मसाला, स्नैक्स सॉस, जलेबी, केसर बाटी, पेटीज, ले फैट क्रीम, मैदा और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद अधोमानक या मानक से विपरीत पाए गए हैं।
रिपोर्ट आने तक बाजार में खप चुका होता है मिलावटी माल
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि नमूने जांच के लिए भेजने और रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता है। तब तक यह मिलावटी सामान बाजार में बिककर लोगों के घरों तक पहुंच चुका होता है। ऐसे में कार्रवाई के बावजूद मिलावट पर पूरी तरह रोक लग पाना मुश्किल है।
अधिकारियों का मानना है कि दोषी दुकानदारों पर जुर्माने से आगे बढ़कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है ताकि मिलावटखोरों में डर पैदा हो और आम जनता की सेहत सुरक्षित रह सके।