श्री आदर्श रामलीला समिति फरीदपुर के तत्वावधान में चल रहे रामलीला महोत्सव में शनिवार को खर-दूषण वध, त्रिसरा वध और सीता हरण की लीलाओं का सजीव मंचन हुआ। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के पात्रों का अद्भुत अभिनय देख दर्शक भावविभोर हो उठे। पूरे मैदान में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।
श्री आदर्श रामलीला मंडल, वृंदावन (मथुरा) के निर्देशक पवन देव चतुर्वेदी व्यास जी व श्रीराम की पूजा-अर्चना कर मंचन का शुभारंभ किया गया। कथा के दौरान बताया गया कि भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में 12 वर्ष बिताने के बाद भरत को अपने चरणों की पादुका देकर विदा किया और फिर अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचे, जहां मुनि की पत्नी अनुसूया जी ने माता सीता को पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया।
इसके बाद भगवान श्रीराम अगस्त्य मुनि के आदेश पर पंचवटी में निवास करने लगे। यहीं रावण की बहन सूर्पनखा भगवान श्रीराम पर मोहित होकर विवाह का प्रस्ताव रखती है। इंकार करने पर वह सीता माता को डराती है, तब लक्ष्मण उसके नाक-कान काट देते हैं। सूर्पनखा अपने भाइयों खर-दूषण को युद्ध के लिए उकसाती है, जिनका भगवान श्रीराम वध करते हैं।
इसके बाद सूर्पनखा रावण को सीता हरण के लिए भड़काती है। रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर श्रीराम को आश्रम से दूर भेज देता है और स्वयं सन्यासी के रूप में सीता माता का हरण करता है। माता की रक्षा करते हुए गिद्धराज जटायु वीरगति प्राप्त करते हैं। इसके बाद मंचन में श्रीराम का सीता-वियोग का दृश्य दिखाया गया, जिसने दर्शकों को भावनाओं से भर दिया। रामलीला मैदान में आयोजित मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, झूलों और तरह-तरह के स्टालों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
महोत्सव में मेला कमेटी के संरक्षक वी.एन. अग्रवाल, अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष अतीश अग्रवाल, वरिष्ठ अध्यक्ष विकास अग्रवाल (शानू), महामंत्री प्रतीक सिंगल, कोषाध्यक्ष ब्रह्मा शंकर गुप्ता, ऑडिटर सौरभ अग्रवाल, मुख्य मेले के प्रबंधक सर्वेश अग्रवाल (बवलू), कानूनी सलाहकार एड. ओमवीर गुर्जर, मीडिया प्रभारी शैलेश सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।