दीपावली का पर्व रोशनी, प्रेम और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन जब यह त्योहार किसी के चेहरे पर मुस्कान बनकर उतरता है, तब इसका असली अर्थ पूरा होता है। इसी भावना को साकार करते हुए सोरों कोतवाल जगदीश चंद्र ने इस बार दीपावली को मानवता और सेवा के रूप में मनाकर एक मिसाल पेश की।
त्योहार की पूर्व संध्या पर मंगलवार को कोतवाल जगदीश चंद्र लहरा स्थित ‘अपना आश्रम’ पहुंचे, जहां असहाय, बेसहारा और अनाथ लोगों के बीच उन्होंने दीपावली की खुशियां बांटीं। उन्होंने सभी को नए वस्त्र, मिठाई और उपहार वितरित किए। दीपों की रोशनी और मुस्कुराते चेहरों के बीच उन्होंने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
कोतवाल ने इस मौके पर कहा कि गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों की सेवा से जो आत्मिक शांति मिलती है, वह किसी और कार्य से नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि समाज का हर व्यक्ति अगर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करे, तो वही सच्ची पूजा और सच्चा दीपोत्सव होगा।
आश्रम में रहने वाले लोगों ने भी कोतवाल के इस मानवीय कार्य की सराहना की। नए वस्त्र पहनने और मिठाई चखने के बाद उनके चेहरों पर प्रसन्नता झलक उठी। उन्होंने कहा कि जब भी कोई त्यौहार आता है, कोतवाल जगदीश चंद्र स्वयं आकर उनके साथ इसे मनाते हैं। उनका यह संवेदनशील व्यवहार समाज में इंसानियत की नई मिसाल कायम कर रहा है।
कोतवाल के इस कार्य ने न केवल पुलिस विभाग की संवेदनशील छवि को उजागर किया, बल्कि यह भी साबित किया कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की रखवाली नहीं करती, बल्कि समाज की भावनाओं को भी मजबूत बनाती है। दीपावली की यह शाम उन असहाय लोगों के लिए यादगार बन गई, जिनके जीवन में कोतवाल जगदीश चंद्र ने उम्मीद की नई किरण जलाई।