Saturday, April 4, 2026

नाड़ा तोड़ना ‘तैयारी’ नहीं, दुष्कर्म का प्रयास: कासगंज किशोरी केस में Supreme Court of India ने Allahabad High Court का फैसला पलटा, धाराएं फिर बहाल

लेखक: udit kumar | Category: BiG News | Published: February 20, 2026

नाड़ा तोड़ना ‘तैयारी’ नहीं, दुष्कर्म का प्रयास: कासगंज किशोरी केस में Supreme Court of India ने Allahabad High Court का फैसला पलटा, धाराएं फिर बहाल

जागरण टुडे,कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

देश की सर्वोच्च अदालत ने कासगंज की 14 वर्षीय किशोरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में बुधवार को अहम निर्णय सुनाते हुए Allahabad High Court के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने पूर्व में दो आरोपियों पर लगे दुष्कर्म के प्रयास के आरोपों को कम गंभीर अपराध में परिवर्तित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि महिला के निजी अंग पकड़ना, सलवार का नाड़ा खोलना और उसे नाले के नीचे घसीटना जैसी हरकतों को केवल “तैयारी” नहीं माना जा सकता। यह कृत्य दुष्कर्म के प्रयास की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई धाराओं को पुनः बहाल कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की पूर्व टिप्पणियों को असंवेदनशील और अमानवीय बताते हुए कहा कि यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण संवेदनशील और पीड़िता-केंद्रित होना चाहिए। साथ ही, अदालत ने ऐसे मामलों में स्पष्ट और व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता भी जताई है।

पीड़िता की मां ने जताया संतोष

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता की मां ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद हम खुद को अकेला महसूस कर रहे थे, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर हमें सहारा दिया। अब हमारी बेटी को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।”

क्या है पूरा मामला?

घटना 10 नवंबर 2021 की है। किशोरी अपनी मां के साथ गांव जा रही थी। आरोप है कि परिचित युवक पवन (निवासी ब्रिसिंगपुर) और आकाश (निवासी उतरना) उसे गांव छोड़ने के बहाने बाइक पर बैठाकर ले गए। सरावल-खजुरा मार्ग स्थित पुलिया के पास बाइक रोककर दोनों ने किशोरी के साथ अश्लील हरकत की और सलवार का नाड़ा तोड़कर दुष्कर्म का प्रयास किया।रास्ते से गुजर रहे सतीश और भूरे ने जब आरोपियों को रोका तो उन्होंने तमंचा दिखाकर धमकाया और मौके से फरार हो गए।

न्याय के लिए लंबी लड़ाई

परिजनों ने सिढ़पुरा थाने में शिकायत की, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद 12 जनवरी 2022 को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में धारा 156(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रार्थना पत्र दिया गया।

21 मार्च 2022 को परिवाद दर्ज हुआ और 23 जून 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, पॉक्सो एक्ट की धारा 18 तथा 504, 506 के तहत आरोपियों को तलब किया गया। इसके बाद आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे, जहां 17 मार्च 2025 को आरोपों को हल्का कर दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से दुष्कर्म के प्रयास की धाराएं फिर से लागू हो गई हैं।

कानूनी दृष्टि से अहम फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए राहत है, बल्कि भविष्य में यौन अपराधों की सुनवाई के लिए भी एक महत्वपूर्ण नज़ीर साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिशा-निर्देश तैयार करने की पहल से ऐसे मामलों में स्पष्टता और संवेदनशीलता बढ़ने की उम्मीद है।

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