जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद मे भी साइबर ठगों के जाल मे लोग तेजी से फसते नजर आ रहे है। ताजा मामले में कस्बा गंजडुंडवारा के मोहल्ला खेरू निवासी 72 वर्षीय मुहम्मद स्वालेह अंसारी को खुद को पुलिस, CBI और NIA का अधिकारी बताने वाले शातिरों ने डिजिटल अरेस्ट कर डरा धमका 31 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना लिया। ठगों ने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए बुजुर्ग को इस कदर मानसिक दबाव में रखा कि उन्होंने दो किश्तों में RTGS के माध्यम से लाखो की पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।
फर्जी अधिकारियों का जाल, “डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड” का डर
पीड़ित के अनुसार 12 मार्च को उनके पास एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को “डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया” की अधिकारी प्रिया शर्मा बताया। उसने दावा किया कि 25 फरवरी को मुंबई में उनके नाम से बैंक खाता खोलकर आतंकियों को धन भेजा गया है। इसके बाद “पुलावा मुंबई हेडक्वार्टर” में दर्ज कथित केस का हवाला देकर पूरे मामले को बेहद गंभीर बताकर डर का माहौल बनाया गया, और अपने नेटवर्क के लोगों से सर्म्पक करवाया गया। यह भी कहाँ गया कि कुछ आतंकियो के स्थान पर छापेमारी मे उनका आधार कार्ड भी मिला है। इस दौरान उन सम्बंधित 6 आतंकियो के पोस्टर भी उन्हें भेजे गए।
कमरे में बंद कर बनाया मानसिक दबाव
12 से 19 मार्च के बीच ठग लगातार फोन पर निर्देश देते रहे। इस दौरान पीड़ित को कमरे में अकेले रहने, किसी से बातचीत न करने और हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर “रिपोर्ट” देने के लिए मजबूर किया गया। इसी दौरान निगरानी मे उनसे RTGS फॉर्म भरवाए गए और पहली किश्त में 26 लाख तथा दूसरी किश्त में 5 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
RBI के नाम पर झांसा, बढ़ता गया भरोसा
ठगी के दौरान शातिरों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि “रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जांच के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।” इसी झांसे में आकर पीड़ित लगातार उनके संपर्क में बने रहे और उन्हें भरोसा होता गया कि पैसा सुरक्षित वापस मिल जाएगा।
दबाव मे एफडी तुड़वाने तक पहुंचा मामला
ठगों ने यहीं नहीं रुकते हुए पीड़ित पर और रकम भेजने का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके चलते वह अपनी एफडी तुड़वाने की तैयारी करने लगे थे। क्यों कि लगातार डर और मानसिक दबाव के कारण वह ठगों के झांसे में पूरी तरह फंस चुके थे।
बच्ची की सतर्कता से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब घर में एक बच्ची ने पीड़ित के फोन पर संदिग्ध मैसेज देखे और परिजनों को जानकारी दी। परिवार ने तुरंत हस्तक्षेप कर आगे की रकम ट्रांसफर होने से रोक दिया, जिससे और बड़ी ठगी टल गई।
FIR दर्ज कराई, जांच शुरू
मामले मे पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। साइबर सेल की सलाह पर थाना गंजडुंडवारा में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है। पीड़ित ने पुलिस को सभी ट्रांजेक्शन डिटेल, व्हाट्सएप चैट और संदिग्ध मोबाइल नंबर सौंप दिए हैं।
एसपी बोले “डिजिटल अरेस्ट” से रहें सावधान
पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, सरकारी एजेंसी के नाम पर बनाए गए दबाव या “डिजिटल अरेस्ट” जैसे झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और नजदीकी थाने को सूचना दें।
आखिर क्या है “डिजिटल अरेस्ट” ठगी
यह साइबर फ्रॉड का नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए व्यक्ति को “नजरबंद” जैसा महसूस कराते हैं। डर और मानसिक दबाव बनाकर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं।