डुवासु मथुरा द्वारा एक विचारपूर्ण एवं प्रभावशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पक्षी संरक्षण और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया गया। यह पहल जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा संचालित थी, जो उनकी पारिस्थितिक जागरूकता और सकारात्मक कार्यभावना को दर्शाती है।
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द स्पैरो क्लब एक नवीन छात्र-नेतृत्व पहल है, जिसकी स्थापना मात्र तीन माह पूर्व एक स्पष्ट और सार्थक उद्देश्य के साथ की गई थी। इस विचार की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब कुलपति डॉ. अभिजित मित्र एवं उस समय के जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरपी पांडेय ने विद्यार्थियों को परिसर की जैव विविधता में मौजूद कमियों को दूर करने हेतु एक केंद्रित संरक्षण पहल शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
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डुवासु परिसर विविध जैव विविधता से समृद्ध है, जहां अनेक प्रकार के वृक्ष, पक्षी एवं स्तनधारी पाए जाते हैं, और मोर, बब्बलर, इंडियन रोलर तथा ग्रे हॉर्नबिल जैसे पक्षी नियमित रूप से देखे जाते हैं, फिर भी गौरैया की स्पष्ट अनुपस्थिति ने विद्यार्थियों को चिंतित किया। इसी प्रेरणा से विद्यार्थियों ने गौरैया की पुनर्स्थापना और संरक्षण के उद्देश्य से स्पैरो क्लब का गठन किया।
प्रभागीय वन कार्यालय, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) तथा पक्षी संरक्षण में सक्रिय अन्य संस्थाओं से व्यापक परामर्श के पश्चात क्लब ने विश्व गौरैया दिवस को जागरूकता एवं क्रियात्मक पहल के रूप में मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम से पूर्व के सप्ताहों में विद्यार्थियों ने परिसर में अनेक नेस्ट बॉक्स, फीडर एवं जल पात्र स्थापित किए, ताकि गौरैया के लिए अनुकूल आवास तैयार किया जा सके।
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कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डॉ. अभिजित मित्र की अध्यक्षता में किया गया। मुख्य अतिथि शैलजाकांत मिश्र, उपाध्यक्ष, ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने अपने संबोधन में कहा कि गौरैया संरक्षण समाज की साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए सक्रिय जनभागीदारी आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि श्री वेंकट श्रीकर पटेल, प्रभागीय वन संरक्षक, मथुरा ने वन विभाग द्वारा पक्षी संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला तथा जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में फलदार वृक्षों के रोपण पर विशेष बल दिया जाएगा, जो गौरैया सहित अन्य पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राकृतिक बीज प्रसार में भी सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गौरैया संरक्षण के महत्व तथा जैव विविधता संरक्षण में समुदाय की भूमिका जैसे विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। विश्वविद्यालय के “चिरैया द स्पैरो क्लब” द्वारा निर्मित एक लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें देशभर में चल रही संरक्षण गतिविधियों को दर्शाया गया।