Thursday, April 23, 2026

मिट्टी जांच के बिना खाद डालना नुकसान का सौदा, संतुलित उर्वरक से बढ़ेगी पैदावार

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: April 23, 2026

मिट्टी जांच के बिना खाद डालना नुकसान का सौदा, संतुलित उर्वरक से बढ़ेगी पैदावार

जागरण टुडे

मथुरा। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मथुरा द्वारा मंगलवार को विकासखंड बलदेव के गांव आंगई में “फसलों में उर्वरकों का संतुलित प्रयोग” विषय पर गहन जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल की।


कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अभिजीत मित्रा एवं निदेशक प्रसार प्रो. संजीव कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित हुआ। केंद्र के प्रभारी डॉ. वाई.के. शर्मा ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं न्यायसंगत प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी परीक्षण के रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग खेत की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है और उत्पादन लागत भी बढ़ाता है।

उद्यान वैज्ञानिक डॉ. बृजमोहन ने किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद का प्रयोग कर सब्जी, बागवानी और फल उत्पादन से बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।

मृदा वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार राजपूत ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं और उसी के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने सड़ी हुई गोबर की खाद, ढैंचा की हरी खाद और फसल अवशेषों से तैयार खाद के उपयोग पर जोर दिया। इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव होता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता गांव के प्रगतिशील किसान सौदान सिंह सिकरवार ने की। इस अवसर पर राधा कृष्ण, धर्मवीर, गौरव, यशपाल, सूरज और सुखवीर सहित कई किसान उपस्थित रहे।

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