जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद कासगंज की गंजडुंडवारा नगर पालिका परिषद के मौजूदा चेयरमैन हाजी मुनब्बर हुसैन का कार्यकाल 26 अप्रैल को तीन वर्ष पूरा करने जा रहा है, लेकिन इन तीन वर्षों में नगर के विकास की तस्वीर उम्मीदों के अनुरूप नजर नहीं आ रही। नगरवासी आज भी टूटी सड़कों, जलभराव, अधूरे निर्माण कार्यों और बोर्ड बैठकों में चल रहे विवादों से जूझ रहे हैं। विकास के दावों के बीच हकीकत यह है कि कस्बे के अधिकांश मुख्य मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं और लोग रोजाना ठोकर खाने को मजबूर हैं।
नगर पालिका परिषद के कार्यकाल की शुरुआत बड़े-बड़े वादों के साथ हुई थी। नगर को स्मार्ट और सुंदर बनाने की बातें कही गईं, लेकिन धरातल पर हालात कुछ और ही नजर आ रहे हैं। नगर के प्रमुख बाजारों और मुख्य मार्गों की सड़कें जगह-जगह से उखड़ी पड़ी हैं। कई स्थानों पर इतने बड़े गड्ढे हो चुके हैं कि वाहन चालकों और राहगीरों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है।
रामलीला से पहले गुणवक्ता विहीन पैचिंग
नगर में हर वर्ष रामलीला मंचन के दौरान स्थानीय लोगों की मांग पर मुख्य मार्गों पर पैचिंग वर्क कराया जाता रहा, ताकि रथ भ्रमण के दौरान झटके न लगें। लेकिन यह पैचिंग कार्य गुणवत्ता विहीन होने के चलते कुछ ही महीनों में उखड़ जाता है और सड़कें फिर पुराने हाल में पहुंच जाती हैं। इससे पालिका के कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़क निर्माण जरूरी, हो रहा फुटपाथ निर्माण
नगरवासियों का आरोप है कि जिन स्थानों पर सड़क निर्माण की सख्त जरूरत है, वहां पालिका द्वारा फुटपाथ निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जर्जर सड़कों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। लोगों का कहना है कि बिना प्राथमिकताएं तय किए कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे जनता को सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा।
कुटेशन से काम, टेंडरो पर भी उठ रहे सवाल
पालिका में अधिकांश कार्य कोटेशन के माध्यम से कराए जाने की चर्चा है। वहीं जिन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है, उनमें कई बार इच्छुक ठेकेदारों को काम न मिलने पर टेंडर निरस्त कर दिए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। इससे कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तीन माह से नहीं हो सकी बोर्ड बैठक
नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक पिछले तीन माह से अधिक समय से नहीं हो सकी है। विकास कार्यों, बजट और प्रस्तावों पर चर्चा के लिए होने वाली बैठकें लगातार टल रही हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सपा प्रवक्ता की एंट्री पर हुआ था घंटों ड्रामा
करीब दो माह पूर्व सांसद देवेश शाक्य द्वारा अपने प्रतिनिधि के रूप में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी को बोर्ड बैठक में शामिल होने के लिए नियुक्त किया गया था। उनके बैठक स्थल पर पहुंचते ही जमकर हंगामा हुआ था। घंटों तक चले ड्रामे के बाद बैठक निरस्त कर दी गई थी। इस घटना के बाद से पालिका की कार्यप्रणाली और राजनीति दोनों चर्चा में बनी हुई हैं।
मुख्य मार्ग बदहाल, जनता परेशान
नगर के लगभग सभी प्रमुख मार्गों की हालत खस्ता है। बरसात से पहले यदि इनका निर्माण नही कराया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल कागजी योजनाएं बन रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।
वैसे 26 अप्रैल को नगर पालिका परिषद के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो जाएंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन तीन वर्षों में नगर को क्या मिला। जनता अब जवाब चाहती है कि विकास के दावों के बीच आखिर नगर की सड़कों, और मूलभूत सुविधाओं की तस्वीर कब बदलेगी।