सोरों (अंकित पंडित)। लहरा घाट पर मंगलवार को अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नदी में लोगों के फंसे होने की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम तेज रफ्तार से बचाव अभियान में जुट गई। नावें दौड़ने लगीं, रेस्क्यू उपकरण सक्रिय हो गए और राहत-बचाव की पूरी कार्रवाई शुरू हो गई। हालांकि कुछ ही देर बाद स्पष्ट हुआ कि यह किसी वास्तविक हादसे का नहीं, बल्कि संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित बाढ़ एवं जल बचाव (Flood Water Rescue–FWR) मॉक ड्रिल थी।
8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) द्वारा जनपद कासगंज के लहरा घाट पर यह व्यापक मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत-बचाव कार्यों का अभ्यास करना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
मॉक ड्रिल का नेतृत्व 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ के टीम कमांडर निरीक्षक चमन किशोर गुप्ता ने किया। उनके नेतृत्व में 30 सदस्यीय प्रशिक्षित एवं आधुनिक उपकरणों से लैस बचाव दल ने वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप रेस्क्यू अभियान का प्रदर्शन किया। अभ्यास के दौरान नाव संचालन, तेज बहाव में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, प्राथमिक उपचार देना तथा सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने जैसी महत्वपूर्ण बचाव तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
मॉक अभ्यास के दौरान अपर जिलाधिकारी दिग्विजय प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार, तहसीलदार बलवंत उपाध्याय, एसडीएम एवं प्रभारी ईओ हर्षिता देवड़ा, इंस्पेक्टर लोकेश भाटी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लिया। पीएसी, आपदा मित्रों, स्थानीय गोताखोरों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी संयुक्त रूप से भाग लेकर आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली का अभ्यास किया।
एनडीआरएफ अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के संयुक्त अभ्यासों का उद्देश्य संभावित बाढ़ एवं जलजनित आपदाओं से पहले आमजन को जागरूक करना, विभागों के बीच तालमेल मजबूत करना तथा आपदा के समय त्वरित, प्रभावी और संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अंत में 8वीं वाहिनी एनडीआरएफ ने नागरिकों से अपील की कि वर्षा और बाढ़ के मौसम में प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अफवाहों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या एनडीआरएफ को सूचना दें। साथ ही भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता एवं क्षमता-विकास कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने की बात कही।