तालाब भूमि पर प्रस्तावित निर्माण के आरोपो को लेकर बढ़ा था विवाद, राजस्व परिषद लखनऊ तक की गई थी शिकायत
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा द्वारा कादरगंज रोड स्थित तालाब के पास प्रस्तावित 41 दुकानों के निर्माण को लेकर उठा विवाद अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। मामले का जिला प्रशासन द्वारा संज्ञान लेने के बाद नगर पालिका की ओर से जारी ई-निविदा के संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पालिका प्रशासन उक्त निविदा को निरस्त करने की तैयारी में जुट गया है।
आपको बता दे प्रस्तावित निर्माण को लेकर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ कई सभासदों ने भी पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। वार्ड 17 के सभासद कृष्ण कुमार सिंह, वार्ड 10 की सभासद रेखा गुप्ता, सभासद लुबना शाहीन और मुदस्सिर ने संयुक्त रूप से राजस्व परिषद लखनऊ, अधिशासी अधिकारी सहित जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर गाटा संख्या 766/0.533 हेक्टेयर भूमि को तालाब बताते हुए पूरी निविदा प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की थी।
वहीं कस्बे के मोहल्ला धनपाल निवासी उदित कुमार विजय द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मुनब्बर हुसैन एवं अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार को दिए गए विस्तृत आपत्ति पत्र में निर्माण स्थल की वैधानिक स्थिति, जलनिकासी व्यवस्था और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि नगर पालिका परिषद ने 8 मई को राज्य वित्त आयोग की धनराशि से वार्ड-02 कादरगंज रोड स्थित तालाब के पास 41 दुकानों के निर्माण हेतु ई-निविदा जारी की थी, जिसकी अनुमानित लागत एक करोड़ रुपये से अधिक है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि गाटा संख्या 766/0.533 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में तालाब एवं जलमग्न भूमि के रूप में दर्ज है। ऐसे में उस भूमि पर व्यावसायिक दुकानों का निर्माण कराना नियमों के विपरीत होने के साथ-साथ पर्यावरणीय एवं राजस्व संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन भी हो सकता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। साथ ही आशंका जताई गई कि यदि तालाब क्षेत्र में स्थायी निर्माण हुआ तो बरसात के दौरान प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित होगी और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है।
इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि निविदा ऐसे समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई जो कस्बे में नियमित रूप से वितरित नहीं होते, जिससे आम नागरिकों और संभावित आपत्तिकर्ताओं को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रभावित नागरिकों से पूर्व चर्चा या जनसुनवाई न होने पर भी सवाल उठाए गए थे।
मामले के तूल पकड़ने और जिला प्रशासन के संज्ञान में आने एवं प्राप्त निर्देशो के बाद अब नगर पालिका प्रशासन ई-निविदा निरस्त करने की तैयारी मे है।
इस संबंध में अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि उक्त निविदा के संबंध में जिला प्रशासन से निर्देश प्राप्त हुए हैं। साथ ही कई आपत्तियां भी प्राप्त हुई हैं, जिनके अनुरूप अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।