जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
अलीगढ़ के चर्चित लूट एवं हत्याकांड में कथित रूप से निर्दोष लोगों को आरोपी बनाकर जेल भेजने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। वर्तमान में कासगंज के सहावर थाने में तैनात इंस्पेक्टर गोविंद वल्लभ शर्मा के बार-बार अदालत में गवाही के लिए उपस्थित न होने पर न्यायालय ने उनका वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं।
मामला 24 जनवरी 2021 का है, जब अलीगढ़ के दादों थाना क्षेत्र में उनकी तैनाती के दौरान एक युवक की लूट के बाद हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी गोविंद वल्लभ शर्मा की अगुवाई में हुई विवेचना के दौरान पहले से जेल में बंद भगवती उर्फ कालीचरण, कोमल समेत छह लोगों को इस मामले में आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।
बाद में कालीचरण की पत्नी ने न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया कि उसके पति सहित अन्य लोगों को झूठा फंसाया गया है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद गोविंद वल्लभ शर्मा समेत 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ साजिश रचने और निर्दोषों को फंसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया।
वर्तमान में यह मामला अलीगढ़ न्यायालय में विचाराधीन है। इंस्पेक्टर गोविंद वल्लभ शर्मा इस मामले में महत्वपूर्ण साक्षी हैं, लेकिन अदालत द्वारा कई बार समन, नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बावजूद वह गवाही देने नहीं पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया, लेकिन वहां भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
इंस्पेक्टर की लगातार अनुपस्थिति पर नाराज अदालत ने कासगंज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला कोषाधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि जब तक वह न्यायालय में उपस्थित होकर अपनी गवाही पूरी करने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करते, तब तक उनका वेतन जारी न किया जाए।
न्यायालय के इस आदेश ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है। वहीं, मामले को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।