जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 12 जून को कासगंज आगमन जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। आधिकारिक तौर पर वह पूर्व सांसद देवेन्द्र सिंह यादव के उर्मिला गार्डन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस कार्यक्रम को कहीं अधिक महत्व दिया जा रहा है। चर्चाएं हैं कि इसी मंच से देवेंद्र सिंह यादव की समाजवादी पार्टी में वापसी का ऐलान हो सकता है।
कौन हैं देवेंद्र सिंह यादव
पूर्व में एटा और वर्तमान में कासगंज जनपद के सोरों विकासखंड के अलीपुर बरवारा गांव में जन्मे देवेंद्र सिंह यादव क्षेत्र की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने किशोरावस्था में ही राजनीति में रुचि लेनी शुरू कर दी थी। बताया जाता है कि मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता दाताराम यादव को प्रधान का चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।
पिता के निधन के बाद वर्ष 1982 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और गांव के प्रधान बने। इसके बाद 1983 में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतकर क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कांग्रेस नेता और उद्योगपति Salim Sherwani से निकटता के बाद उनकी पहुंच राष्ट्रीय राजनीति तक हुई।
वर्ष 1989 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पटियाली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 1996 में सपा के टिकट पर फिर विधायक बने। इसी दौरान उनकी पहचान सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में होने लगी।
दो बार सांसद रहे
मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 1999 में देवेंद्र सिंह यादव को एटा लोकसभा सीट से टिकट दिया। उन्होंने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की और सांसद बने। वर्ष 2004 में भी वह दोबारा एटा से सांसद चुने गए। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई और वह सपा के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे।
कई दलों का कर चुके हैं सफर
वर्ष 2009 में टिकट कटने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी से बगावत कर बसपा का दामन थामा। बाद में कांग्रेस में गए और फिर 2014 में एक बार फिर समाजवादी पार्टी में लौट आए। 2014 और 2019 में उन्होंने एटा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह से हार गए।
लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल होने की बात कही थी।
अब फिर घर वापसी की अटकलें
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार भाजपा में अपेक्षित राजनीतिक भूमिका और सम्मान न मिलने से वह असहज महसूस कर रहे थे। पिछले कुछ समय से उनके असंतोष की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का उनके निजी कार्यक्रम में शामिल होना इन अटकलों को और बल दे रहा है कि सपा नेतृत्व उन्हें दोबारा अपने साथ जोड़ने की तैयारी में है।
2027 की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा दौरा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कासगंज जिले की पटियाली और अमांपुर विधानसभा सीटों पर आज भी देवेंद्र सिंह यादव का प्रभाव बना हुआ है। यादव मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में यदि उनकी समाजवादी पार्टी में वापसी होती है तो यह 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हो सकती है।
फिलहाल 12 जून के उर्मिला गार्डन उद्घाटन समारोह पर सभी की नजरें टिकी हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि कासगंज और एटा की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत का मंच भी बन सकता है।