गंजडुंडवारा। एक ओर केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर जनप्रतिनिधि और भाजपा संगठन उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा के तीन वर्ष के कार्यकाल में कस्बावासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। नगर के प्रमुख मार्गों की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
कस्बे के लोगों का कहना है कि नगर पालिका के तीन साल के कार्यकाल में विकास कार्यों की अपेक्षा सड़कों पर गड्ढे अधिक दिखाई दे रहे हैं। नगर के प्रमुख मार्ग एटा रोड, सुदामापुरी रोड और थाना रोड पर बार-बार पेचिंग कार्य कराया गया, लेकिन यह मरम्मत कुछ ही दिनों में उखड़ गई। बताया जाता है कि इन मार्गों पर तीन बार तक पेचिंग कराई गई, लेकिन सड़कें स्थायी रूप से ठीक नहीं हो सकीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार नगर में कई स्थानों पर नाला एवं सड़क निर्माण कार्य भी कराए गए, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि दो माह के भीतर ही सड़कें उखड़ने लगीं और कई स्थानों पर नालों में दरारें दिखाई देने लगीं। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कस्बावासियों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाए गए, जिनमें से अधिकांश मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कई वार्डों में आवश्यकता से अधिक ब्रेकर बना दिए गए, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की बजाय ब्रेकर निर्माण पर अधिक ध्यान दिया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की चर्चा भी आम है।
नगर में हुए निर्माण कार्यों को लेकर पूर्व में जांच भी कराई गई थी। उस समय गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठे थे। हालांकि जांच का परिणाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लोगों का आरोप है कि जांच भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। जिस समय जिन निर्माण कार्यों की जांच हुई थी, उनमें से कई कार्य अब धरातल पर क्षतिग्रस्त या पूरी तरह ढह चुके हैं।
नगरवासियों का कहना है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें विकास और सुशासन के दावे कर रही हैं, तब स्थानीय निकायों के कार्यों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका के पिछले तीन वर्षों में हुए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
कस्बे के नागरिकों का मानना है कि विकास केवल शिलापट्ट लगाने या निर्माण कार्य शुरू करने से नहीं होता, बल्कि उसकी गुणवत्ता और स्थायित्व से होता है। नगर की बदहाल सड़कें और उखड़ते निर्माण कार्य विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।