सलोनी और कोमल ने अपने जीवन से लिखी प्रेम, साहस और बलिदान की ऐसी कहानी, जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
कभी-कभी कुछ घटनाएं केवल खबर नहीं होतीं, बल्कि मानवता, प्रेम और त्याग का ऐसा उदाहरण बन जाती हैं जिन्हें समाज वर्षों तक याद रखता है। कासगंज जिले के सुन्नगढ़ी क्षेत्र में हुई एक ऐसी ही घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
16 वर्षीय सलोनी और 14 वर्षीय कोमल ने यह साबित कर दिया कि भाई-बहन का रिश्ता केवल शब्दों का नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और बलिदान का भी प्रतीक होता है। गंगा स्नान के दौरान जब उनका 12 वर्षीय भाई शिवनेश गहरे पानी में डूबने लगा, तब दोनों बहनों ने एक पल के लिए भी अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने खतरे को सामने देखकर पीछे हटने के बजाय अपने भाई को बचाने का फैसला किया।
गंगा की तेज धार और गहराई के बीच दोनों बहनें भाई तक पहुंचीं और उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहीं। उनका प्रयास सफल रहा, भाई की सांसें बच गईं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। भाई को जीवन देने वाली दोनों बहनें खुद गहरे पानी में फंस गईं और हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
आज जब समाज में रिश्तों के बदलते स्वरूप पर चर्चा होती है, तब सलोनी और कोमल का यह त्याग हमें याद दिलाता है कि सच्चा प्रेम और अपनापन आज भी जीवित है। इन दोनों बहनों ने किसी मंच पर भाषण देकर नहीं, बल्कि अपने अंतिम क्षणों में साहस और जिम्मेदारी का परिचय देकर जीवन का सबसे बड़ा संदेश दिया है।
उनकी कहानी केवल एक हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि निस्वार्थ प्रेम, कर्तव्य और परिवार के लिए समर्पण की भावना कितनी महान हो सकती है। सलोनी और कोमल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, त्याग और अपने भाई के प्रति प्रेम हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
दो बहनों का यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और यह याद दिलाता है कि सच्चे रिश्तों की सबसे बड़ी पहचान त्याग और समर्पण ही होती है।