कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदले; 15 दिन के लिए टला आंदोलन,पालिका अध्यक्ष व एसडीएम ने जूस पिलाकर कराया अनशन समाप्त
नगर पालिका परिषद सोरों में पिछले तीन दिनों से चल रहे सभासदों के क्रमिक आंदोलन धरना एवं भूख हड़ताल के आगे आखिरकार पालिका प्रशासन और अध्यक्ष को झुकना पड़ा। 13 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन देने, कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में तत्काल बदलाव करने तथा जांच प्रक्रिया शुरू करने की सहमति के बाद शुक्रवार को आंदोलन को 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। नगर पालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे एवं प्रभारी अधिशासी अधिकारी/एसडीएम हर्षिता देवड़ा ने अनशनरत सभासदों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई।
धरने के दौरान सभासदों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, विकास कार्यों की गुणवत्ता, एक ही पटल पर वर्षों से जमे कर्मचारियों, लंबित वेतन, वार्डों की मूलभूत समस्याओं तथा खरीद-फरोख्त एवं निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच सहित 13 सूत्रीय मांगपत्र प्रशासन को सौंपा था। लगातार तीन दिनों तक चले आंदोलन और बढ़ते जनसमर्थन के बाद प्रशासन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा।
धरना समाप्त होने के साथ ही प्रशासन ने अपनी ओर से पहली कार्रवाई करते हुए नगर पालिका कर्मचारियों के कार्यों का पुनर्विभाजन कर दिया। प्रभारी अधिशासी अधिकारी द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार बड़े बाबू जयप्रकाश दुबे, लिपिक पंकज कुमार (भार्गव), प्रकाश व्यवस्था प्रभारी समेत कई कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदल दिए गए। सभासदों का कहना था कि वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत कर्मचारियों के कारण पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी और यह उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था। कर्मचारियों के दायित्वों में बदलाव को आंदोलन की पहली सफलता माना जा रहा है।
सभासदों के 13 सूत्रीय मांगपत्र में डीजल खर्च की उच्चस्तरीय जांच, वर्ष 2023 से अब तक कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच, दोषी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने, वित्तीय अनियमितताओं की जांच, कर्मचारियों के लंबित वेतन एवं पीएफ का भुगतान, जलकल, विद्युत उपकरण, वाहन मरम्मत एवं अन्य खरीद के बिलों का सत्यापन, बैटरियों एवं सोलर प्लांट की जांच, नियमित बोर्ड बैठकें कराने, वार्डों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने तथा सभासदों की निगरानी समिति गठित करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
प्रशासन के आश्वासन के बाद सभासदों ने फिलहाल आंदोलन को 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि तय समय सीमा में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो धरना और भूख हड़ताल पहले से अधिक व्यापक स्तर पर दोबारा शुरू की जाएगी।
सभासद विष्णुकांत तिवारी ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नगर पालिका में पारदर्शिता स्थापित करने और जनता के धन की सुरक्षा के लिए किया गया है। प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया है, इसलिए फिलहाल जनहित में आंदोलन स्थगित किया गया है।
सभासद पवनेश सक्सेना ने कहा कि नगर पालिका में वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो सभी सभासद फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।
सभासद रिंकू नितेश पचौरी ने कहा कि सभी वार्डों में विकास कार्य और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर पालिका की जिम्मेदारी है और प्रशासन को अपने आश्वासन पर अमल करना होगा।
सभासद जयपाल कश्यप ने कहा कि जनता के धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मांगपत्र के प्रत्येक बिंदु पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
सभासद प्रतिनिधि मुनीश चौधरी ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि केवल 15 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। यदि प्रशासन ने संतोषजनक कार्रवाई नहीं की तो सभी सभासद जनता के साथ मिलकर फिर से धरना और भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
नगर पालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे ने कहा कि नगर हित सर्वोपरि है। सभासदों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जिन बिंदुओं पर जांच आवश्यक है, उन पर नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर पालिका पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ विकास कार्य कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रभारी अधिशासी अधिकारी एसडीएम हर्षिता देवड़ा ने कहा कि सभासदों का मांगपत्र प्राप्त हो गया है और जिन बिंदुओं पर प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है, उन पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। सभी मांगों का निष्पक्ष परीक्षण कर शासन के नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।