13 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद बनी सहमति, कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में भी किया गया बदलाव
जागरण टूडे, अंकित पंडित, सोरों (कासगंज)।
नगर पालिका परिषद सोरों में पिछले तीन दिनों से चल रहा सभासदों का धरना और भूख हड़ताल शुक्रवार को प्रशासन के साथ हुई सहमति के बाद 15 दिनों के लिए स्थगित कर दी गई। पालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे तथा एसडीएम एवं अधिशासी अधिकारी हर्षिता देवड़ा ने अनशनरत सभासदों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई।
सभासदों ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, विकास कार्यों की गुणवत्ता, वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत कर्मचारियों, लंबित वेतन, वार्डों की मूलभूत समस्याओं तथा विभिन्न खरीद और निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच सहित 13 सूत्रीय मांगपत्र प्रशासन को सौंपा था।
धरना स्थगित होने के साथ ही प्रशासन ने कुछ मांगों पर प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों के कार्यों का पुनर्विभाजन किया। अधिशासी अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार बड़े बाबू जयप्रकाश दुबे, लिपिक पंकज कुमार (भार्गव), प्रकाश व्यवस्था प्रभारी समेत अन्य कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया। सभासदों का कहना है कि लंबे समय से एक ही पटल पर कार्यरत कर्मचारियों के कारण कार्यों की पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी।
मांगपत्र में वर्ष 2023 से अब तक कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच, डीजल खर्च और वित्तीय अनियमितताओं की जांच, दोषी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने, कर्मचारियों के लंबित वेतन एवं पीएफ का भुगतान, जलकल, विद्युत उपकरण, वाहन मरम्मत, बैटरियों एवं सोलर प्लांट की जांच, नियमित बोर्ड बैठकें आयोजित करने तथा वार्डों के विकास कार्यों की निगरानी समिति गठित करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
सभासद विष्णुकांत तिवारी ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जनहित के लिए है। सभासद पवनेश सक्सेना, रिंकू नितेश पचौरी, जयपाल कश्यप और प्रतिनिधि मुनीश चौधरी ने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो धरना और भूख हड़ताल दोबारा शुरू की जाएगी।
पालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे ने कहा कि नगरहित सर्वोपरि है और सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वहीं एसडीएम एवं अधिशासी अधिकारी हर्षिता देवड़ा ने बताया कि मांगपत्र पर नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है।