जागरण टुडे, मथुरा।
उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त पदुम नारायण द्विवेदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम-2005 के तहत लंबित अपीलों एवं शिकायतों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 से लागू है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग का जन सूचना अधिकारी आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। यदि निर्धारित अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं होती है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। आवेदन शुल्क 10 रुपये निर्धारित है।
बैठक में बताया गया कि मथुरा जनपद से संबंधित 106 अपीलें और शिकायतें उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं। इनमें ग्राम्य विकास विभाग की 49, राजस्व विभाग की 40, पुलिस विभाग की 15, समाज कल्याण विभाग की एक तथा स्वास्थ्य विभाग की एक शिकायत एवं अपील शामिल है।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सभी जन सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सात दिनों के भीतर सभी लंबित मामलों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ आरटीआई आवेदनों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।
राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग अब पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई कर शिकायतों और अपीलों का निस्तारण किया जा रहा है, जिससे आवेदकों और अधिकारियों दोनों को सुविधा मिल रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मांगी गई सूचना जनहित से जुड़ी है तो बार-बार आवेदन किए जाने की स्थिति में भी संबंधित जन सूचना अधिकारी को सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
बैठक में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक वेद प्रिय आर्य सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।